Tuesday, 22 April 2014

आलू के छिलके कमाल के होते हैं, यकीन मानिए। दुनिया भर आलू एक प्रचलित कंद है और इसका इस्तमाल लगभग हर घर में किया जाता है लेकिन दुर्भाग्यवश जानकारी के अभाव में हम इसके छिलकों को फेंक देते हैं। आप जब इसके औषधीय गुणों को जानेंगे तो सिवाय दांतों में ऊंगली दबाने के कुछ ना कर पाएंगे। आपको आश्चर्य होगा कि आलू के छिलकों में आलू के अंदर के हिस्से से ज्यादा महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं। आंखों के नीचे बैग (एक प्रकार की सूजन) बने हों, या चेहरे पर दाग- धब्बे हों या मुहांसे हो..कुछ ना करें सिर्फ आलू के छिलकों के अंदरूनी हिस्से को चेहरे पर लगाए और हल्का हल्का दबाते हुएं रगडें, १५ दिन में मुझे बताएं, फर्क दिखना पडेगा..दावा है मेरा..और तो और इन छिल्कों को ग्राईंड करें, रुई डुबोकर चेहरे पर लगाएं और फिर १५ दिनों में चेहरे की रंगत ना बदले तो बताएं..देसी ज्ञान है बाबा, असर दिखाकर दम लेगा..आज से आलू के छिलके फेंकना बंद..ध्यान रहें, छिलकों के इस्तमाल से पहले आलू को साफ पानी से खूब अच्छी तरह से धो जरूर लें..
ठंडाई - 
- होली से सुरज की किरणें प्रखर होने लगती है और मौसम बदलता है. इससे पित्त बढ़ने लगता है और शरीर में गर्मी बढ़ने से अनेक परेशानियां होने लगती है. इसीलिए ठंडाई का सेवन शुरू किया जाता है.
- जिनको अम्ल पित्त, पित्त प्रकोप और उदर में ज्यादा गर्मी होने की तथा पेट में जलन होने की शिकायत हो, मुँह में छाले होते रहते हों, आँखों और पेशाब में जलन हुआ करती हो, उन्हें ठंडाई का सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इससे यह सभी शिकायतें दूर होंगी।
- शरीर में अतिरिक्त उष्णता बढ़ जाने से तथा पित्त के कुपित रहने से जिन्हे स्वप्नदोष और शीघ्रपतन होने की शिकायत हो, स्त्रियों को रक्तप्रदर होता हो, उन्हें 40 दिन तक नियमित रूप से ठंडाई का सेवन करने से लाभ हो जाता है।
- सुबह के वक्त ठंडाई का सेवन करने से किसी किसी को जुकाम हो जाता है। ऐसी स्थिति में जुकाम ठीक न होने तक ठंडाई का सेवन न करें। 2-3 दिन में शरीर में संचित हुआ कफ, नजला-जुकाम के जरिये निकल जाएगा और जुकाम अपने आप ठीक हो जाएगा। यदि फिर भी हो जाए तो फिर ठंडाई का सेवन सुबह के वक्त न करके दोपहर बाद करना चाहिए।
- नियमित रूप से पौष्टिक ठंडाई का सेवन करने से शरीर में ताजगी और शीतलता बनी रहती है, दिमागी ताकत बनी रहती है, गर्मी से कष्ट नहीं होता, शरीर में जलयांश की कमी (डिहायड्रेशन), लू लगना, डायरिया, उलटी-दस्त-हैजा आदि व्याधियाँ नहीं होतीं, मुँह सूखना, आँखों में जलन होना, पेशाब में रुकावट या कमी, अनिद्रा, पित्तजन्य सिर दर्द, कब्ज रहना, ज्यादा पसीना आना, स्त्रियों को अधिक रक्त स्राव होना आदि शिकायतें नहीं होती।
- जो व्यक्ति सभी सामग्री को अलग-अलग खरीदकर लाना चाहे और उसे उचित मात्रा में मिलाकर घर पर ही ठंडाई का मिश्रण तैयार करना चाहे, वो इस विधि का उपयोग कर सकते हैं। ऐसा करना गुणवत्ता, शुद्धता एवं प्रत्येक द्रव्य को उचित मात्रा में मिश्रण करने की दृष्टि से अच्छा ही होगा।
सामग्री : धनिया, खसखस के दाने, ककड़ी के बीज, गुलाब के फूल, काहू के बीज, खस कुलफे के बीज, सौंफ, काली मिर्च, सफेद मिर्च और कासनी, सभी 11 द्रव्य 50-50 ग्राम। छोटी इलायची, सफेद चन्दन का बूरा और कमल गट्टे की गिरी, तीनों 25-25 ग्राम। इन सबको इमामदस्ते में कूटकर पीस लें और बर्नी में भर लें।
- कमल गट्टे की गिरि और चन्दन का बूरा खूब सूखा हुआ होना चाहिए। कमल गट्टे के पत्ते और छिलके हटाकर सिर्फ गिरि ही लेना है। इस मिश्रण की 10 ग्राम मात्रा एक व्यक्ति के लिए काफी होती है। जितने व्यक्तियों के लिए ठंडाई घोंटना हो, प्रति व्यक्ति 10 ग्राम के हिसाब से ले लेना चाहिए।
- बहुत थोड़ी मात्रा में भांग भी एक औषधि का कार्य करता है. डायरिया, दस्त, उलटी आदि को रोकता है.


नींबू से जुड़े ये परंपरागत उपाय
बड़ी संख्या में कई लोगों द्वारा आज भी किए
जाते हैं। आपने देखा होगा कुछ लोग दुकानों पर और घरों के बाहर
नींबू-मिर्च टांगकर रखते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने
से हमारे घर या दुकान पर
किसी की बुरी नजर
नहीं लगती है।
क्यों लगती है बुरी नजर-
नींबू का उपयोग बुरी नजर से बचने के लिए
विशेष रूप से किया जाता है। बुरी नजर लगने का मुख्य
कारण यह है कि जब कोई व्यक्ति किसी दुकान को,
किसी चीज को, किसी बच्चे
या इंसान को लगातार एकटक अधिक समय तक देखता रहता है
तो बुरी नजर लग जाती है।
बुरी नजर लगने से
पैसों की तंगी शुरु
हो सकती है, सेहत खराब
हो सकती है।
नींबू-मिर्च टांगने के लाभ- नींबू-मिर्च के
कारण व्यक्ति एकटक किसी दुकान या घर को अधिक
समय पर देख नहीं पाता है। नींबू-मिर्च
पर नजर पड़ते ही व्यक्ति को नींबू
का खट्टेपन और मिर्च का तीखापन याद आ जाता है
और व्यक्ति की एकाग्रता भंग
हो जाती है। इस वजह से बुरी नजर से
रक्षा हो जाती है। नींबू-मिर्च टांगने से
बुरी नजर नहीं लगती है
और यदि लगी हुई हो तो उतर जाती है।
बुरी नजर उतरने के बाद धन संबंधी कार्यों में
लाभ होने लगता है।
घर में छुपी ये चीजें रोक
देती है पैसा और तरक्की, बचें इन
चीजों से
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अगर अचानक आपके दिन बदलने लगें, अच्छे दिन बुरे दिनों में बदल
जाएं तो आप सम्भल जाएं। अगर आपके साथ ऐसा होने लगे
तो अपने घर पर ध्यान दें। अपने ही घर में
रखी चीजों पर ध्यान दें।
वास्तु के अनुसार आपके पैसों और तरक्की पर बुरा असर
डालने वाली चीजें आपके
ही घर में रखी होती है और
आपको पता नहीं रहता। अक्सर घर में
रखी कुछ चीजें एक समय के बाद बुरा असर
देने लगती है। इनमें से कुछ चीजें आपके
दैनिक जीवन से संबंधित होती है।
जानिए क्या करें और कैसे बचें-
- अगर आपके घर में बहुत दिनों से बंद घड़ी है
तो उसे हटा दें बंद घड़ी घर में आते हुए पैसों को रोक
देती है।
- आपके घर में टूटी हुई चेयर या टेबल
पड़ी है तो उसे तुरंत घर से हटा दें। ये आपके
पैसों और तरक्की को रोक देती है।
- पुराने या टूटे हुए जूते-चप्पल आपको आगे बढऩे से रोक देते हैं।
इन्हे घर से निकाल दें।
- पूजा में चढ़े हुए और मुरझाए हुए फूल घर में
नहीं रखें इनसे अशुभ फल मिलता है।
- घर में बनने वाले मकड़ी के जाले तुरंत हटा दें इनसे
आपके अच्छे दिन बुरे दिनों में बदल सकते हैं।
- अगर बुरी नजर या ताकत से बचने के लिए
नींबू-मिर्च लग रखें है तो हर रविवार को उन्हें हटा दें
और नए लगा द
Health
सर्दी-जुकाम
ये समस्या होना इस बात को दर्शाता है कि आपके शरीर का इम्यून सिस्टम सही ढंग से काम नहीं कर रहा है, ऐसे में सर्दी-जुकाम को रोकना मुश्किल हो जाता है। प्रायः हर किसी को मौसम में आए बदलाव के कारण कभी न कभी ये समस्या जरूर होती है। अगर आप भी बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम के शिकार हो गए हैं तो ये घरेलू नुस्खे आजमाएं।
गर्म चने को सूंघने से सर्दी-जुकाम दूर हो जाता है। शहद में अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है। खांसी, जुकाम, सर्दी और नॉर्मल फीवर में तुलसी व अदरक की चाय पीने से लाभ होता है। जुकाम होने पर गर्म दूध में छुहारा उबालकर इसमें थोड़ी सी इलायची एवं केसर मिलाकर सेवन करने से जुकाम के रोगाणु खत्म हो जाते हैं। गर्म देसी घी में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर रोटी के साथ सेवन करने से जुकाम ठीक हो जाता है। गुड़ और कालीमिर्च का चूर्ण मिला लें और उसे चाय की तरह उबालकर पीने से भी जुकाम दूर हो जाता है।सरसों के तेल को गुनगना करके छाती, पैर के दोनों तलवों और नाक के चारों तरफ लगाने से भी जुकाम दूर हो जाता है। डेढ़ चम्मच की मात्रा में सौंफ पानी के साथ खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से भी जुकाम होने की संभावना कम हो जाती है।
गले में खराश या सूखी खाँसी होने पर पिसी हुई अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाएँ। गुड़ और घी के स्थान पर शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है। आराम मिलेगा। भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंफ चबाने से मुख की अनेक बीमारियाँ और सूखी खाँसी दूर होती है, बैठी हुई आवाज़ खुल जाती है, गले की खुश्की ठीक होती है और आवाज मधुर हो जाती है। एक गिलास उबलते पानी में एक चम्मच जीरा और एक टुकड़ा अदरक डालें ५ मिनट तक उबलने दें। इसे ठंडा होने दें। हल्का गुनगुना दिन में दो बार पियें। गले की खराश और सर्दी दोनों में लाभ होगा। एक प्याला (२०० मिलीली.) दूध में आधा छोटा चम्मच (२ ग्राम) पिसी हल्दी मिलाकर उबालें। छानकर चीनी मिलाकर पीने को दें। विशेषरूप से सोते समय पीने पर तीन चार दिन में आराम मिल जाता है। रात में इसे पीने के बात मुँह साफ करना चाहिये लेकिन कुछ खाना पीना नहीं चाहिये। एक ग्राम पिसी दालचीनी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर खाने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है।
सूखी खांसी, किसी भी मौसम में हो सकती है।इसका घरेलू उपचार इस प्रकार है-नुस्खा : गाय के दूध से बना घी 15-20 ग्राम और काली मिर्च लेकर एक कटोरी में रखकर आग पर गर्म करें। जब काली मिर्च कड़कड़ाने लगे और ऊपर आ जाए तब उतार कर थोड़ा ठंडा कर के 20 ग्राम पिसी मिश्री मिला दें। थोड़ा गर्म रहे तभी काली मिर्च चबाकर खा लें। इसके एक घंटे बाद तक कुछ खाएं-पिएं नहीं। इसे एक-दो दिन तक लेते रहें, खांसी ठीक हो जाएगी। धूल मिट्टी से नाक में एलर्जी हो जाती है। सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीकर और मिश्री सभी द्रव्यों का चूर्ण 10-10 ग्राम, बीज निकाला हुआ मुनक्का 50 ग्राम, गोदंती हरताल भस्म 10 ग्राम तथा तुलसी के दस पत्ते सभी को मिलाकर खूब घोंटकर पीस लें और 3-3 रत्ती की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखा लें। 2 गोली सुबह व 2 गोली शाम को गर्म पानी के साथ तीन माह तक सेवन करें। ठंडे पदार्थ, बर्फ, दही, ठंडे पेय से परहेज करें। नाक की एलर्जी दूर हो जाएगी।
पालक
पालक मानव के लिए बेहद उपयोगी है। पालक को आमतौर पर केवल हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए गुणकारी सब्जी माना जाता है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि पालक में इसके अलावा और भी कई गुण है जिनसे सामान्य लोग अनजान है। तो आइए हम आपको पालक के कुछ ऐसे ही अद्भूत गुणों से अवगत करवाते हैं उसके पश्चात आप जान सकेंगे कि आप पालक क्यों खायें ?
पालक में पाये जाने वाले विभिन्न तत्व- 100 ग्राम पालक में 26 किलो कैलोरी उर्जा ,प्रोटीन 2 % ,कार्बोहाइड्रेट 2.9 %, नमी 92 % वसा 0.7 %, रेशा 0.6 % ,खनिज लवन 0.7 % और रेशा 0.6 % होता हैं। पालक में विभिन्न खनिज लवण जैसे कैल्सियम, मैग्नीशियम ,लौह, तथा विटामिन ए, बी, सी आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाते हैं।
इसके अतिरिक्त यह रेशेयुक्त, जस्तायुक्त होता है।
इन्हीं गुणों के कारण इसे जीवन रक्षक भोजन भी कहा जाता हैं।
पालक में पाये जाने वाले गुण- पालक खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। खून की कमी से पीड़ित व्यक्तियों को पालक खाने से काफी फायदा पहुंचता है।
गर्भवती स्त्रियों में फोलिक अम्ल की कमी को दूर करने के लिए पालक का सेवन लाभदायक होता है।
पालक में पाया जाने वाला कैल्शियम बढ़ते बच्चों, बूढ़े व्यक्तियों और गर्भवती स्त्रियों व स्तनपान कराने वाली स्त्रियों के लिए वह बहुत फायदेमंद है।
इसके नियमित सेवन से याददाश्त भी मजबूत होती है। शरीर बनाएं मजबूत- पालक में मौजूद फ्लेवोनोइड्स एंटीआक्सीडेंट का काम करता हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने के अलावा हृदय संबंधी बीमारियों से लड़ने में भी मददगार होता है।
सलाद में इसके सेवन से पाचनतंत्र मजबूत होता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटिन और विटामिन सी क्षय होने से बचाता है।
ये शरीर के जोड़ों में होने वाली बीमारी जैसे आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस की भी संभावना को घटाता है।
आंखों के लिये लाभकारी- पालक आंखो के लिए काफी अच्छी होती है। यह त्वचा को रूखे होने से बचाता है।
बाल गिरने से रोकने के लिए रोज पालक खाना चाहिए। पालक के पेस्ट को चेहरे पर लगाने से चेहरे से झाइयां दूर हो जाती है।
पालक कब न खायें? पालक वायुकारक होती है अतः वर्षा ऋतु में इसका सेवन न करें

Saturday, 19 April 2014

Health
हल्दी वाला दूध
- रात को सोते समय देशी गाय के गर्म दूध में एक चम्मच देशी गाय का घी और चुटकी भर हल्दी डालें . चम्मच से खूब मिलाकर कर खड़े खड़े पियें. - इससे त्रिदोष शांत होते है.
- संधिवात यानी अर्थ्राईटिस में बहुत लाभकारी है. - किसी भी प्रकार के ज्वर की स्थिति में , सर्दी खांसी में लाभकारी है.
- हल्दी एंटी माइक्रोबियल है इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है. यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.
- वजन घटाने में फायदेमंद गर्म दूध के साथ हल्दी के सेवन से शरीर में जमा चर्बी घटती है. इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल्स सेहतमंद तरीके से वजन घटाने में सहायक हैं।
- अच्छी नींद के लिए हल्दी में अमीनो एसिड है इसलिए दूध के साथ इसके सेवन के बाद नींद गहरी आती है.अनिद्रा की दिक्कत हो तो सोने से आधे घंटे पहले गर्म दूध के साथ हल्दी का सेवन करें. 
- दर्द से आराम हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया से लेकर कान दर्द जैसी कई समस्याओं में आराम मिलता है. इससे शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे दर्द में तेजी से आराम होता है. 
- खून और लिवर की सफाई आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल शोधन क्रिया में किया जाता है। यह खून से टॉक्सिन्स दूर करता है और लिवर को साफ करता है. पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम के लिए इसका सेवन फायदेमंद है.
- पीरियड्स में आराम हल्दी वाले दूध के सेवन से पीरियड्स में पड़ने वाले क्रैंप्स से बचाव होता है और यह मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा दिलाता है. 
- मजबूत हड्डियां दूध में कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है और हल्दी में एंटीऑक्सीडेट्स भरपूर होते हैं

Thursday, 17 April 2014

भगवान बचाएगा !!!
एक समय की बात है किसी गाँव में एक साधु रहता था, वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे बैठ कर तपस्या किया करता था | उसका भागवान पर अटूट विश्वास था और गाँव वाले भी उसकी इज्ज़त करते थे|
एक बार गाँव में बहुत भीषण बाढ़ आ गई | चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा, सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की तरफ बढ़ने लगे | जब लोगों ने देखा कि साधु महाराज अभी भी पेड़ के नीचे बैठे भगवान का नाम जप रहे हैं तो उन्हें यह जगह छोड़ने की सलाह दी| पर साधु ने कहा-
” तुम लोग अपनी जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा!”
धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता गया , और पानी साधु के कमर तक आ पहुंचा , इतने में वहां से एक नाव गुजरी|
मल्लाह ने कहा- ” हे साधू महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइए मैं आपको सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दूंगा |”
“नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! “, साधु ने उत्तर दिया.
नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया.
कुछ देर बाद बाढ़ और प्रचंड हो गयी , साधु ने पेड़ पर चढ़ना उचित समझा और वहां बैठ कर ईश्वर को याद करने लगा | तभी अचानक उन्हें गड़गडाहत की आवाज़ सुनाई दी, एक हेलिकोप्टर उनकी मदद के लिए आ पहुंचा, बचाव दल ने एक रस्सी लटकाई और साधु को उसे जोर से पकड़ने का आग्रह किया|
पर साधु फिर बोला-” मैं इसे नहीं पकडूँगा, मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा |”
उनकी हठ के आगे बचाव दल भी उन्हें लिए बगैर वहां से चला गया |
कुछ ही देर में पेड़ बाढ़ की धारा में बह गया और साधु की मृत्यु हो गयी |
मरने के बाद साधु महाराज स्वर्ग पहुचे और भगवान से बोले -. ” हे प्रभु मैंने तुम्हारी पूरी लगन के साथ आराधना की… तपस्या की पर जब मै पानी में डूब कर मर रहा था तब तुम मुझे बचाने नहीं आये, ऐसा क्यों प्रभु ?
भगवान बोले , ” हे साधु महात्मा मै तुम्हारी रक्षा करने एक नहीं बल्कि तीन बार आया , पहला, ग्रामीणों के रूप में , दूसरा नाव वाले के रूप में , और तीसरा ,हेलीकाप्टर बचाव दल के रूप में. किन्तु तुम मेरे इन अवसरों को पहचान नहीं पाए |”
मित्रों, इस जीवन में ईश्वर हमें कई अवसर देता है , इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती है कि वे किसी की प्रतीक्षा नहीं करते है , वे एक दौड़ते हुआ घोड़े के सामान होते हैं जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं , यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते है तो वे हमें हमारी मंजिल तक पंहुचा देते है, अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है|