Wednesday, 18 December 2013

पैरों की बिवाईयों
लगभग २० ग्राम मोम लीजिए और लगभग इतनी ही मात्रा में गेंदे की ताजी बारीक-बारीक कटी हरी पत्तियाँ। दोनो को एक बर्तन में लेकर धीमी आंच पर गर्म कीजिए, कुछ देर में मोमपिघलने लगेगी और साथ ही पत्तियों का रस भी मोम के साथ घुल मिल जाएगा..जब मोम पूरी तरह से पिघल जाए, हल्का हल्का खौलने लगे, बर्तन को नीचे उतार दीजिए और ठंडा होने दीजिए..मोम को सोने से पहले पैरों की बिवाईयों पर लगाईये, दिन में भी इस मोम को लगाकर मोजे पहन लें, पैरों की बिवाईयों या कटे फ़टे हिस्से दो दिन में ठीक होने लगेंगे.



Health

GUYABANO (SOURSOP) TEA FOR CANCER, DIABETES, ARTHRITIS AND OTHER INFLAMMATORY DISEASES .~~~~~ HERES HOW TO PREPARE: You will be needing 40 pcs of guyabano leaves 1 liter clean water NOTE: USE MATURE BUT NOT TOO OLD LEAVES. AIR DRIED LEAVES ARE BETTER THAN FRESH LEAVES BECAUSE IT CONCENTRATES THE MEDICINAL PROPERTIES OF THE LEAVES MAKING IT MORE EFFECTIVE. DON'T ALSO DO SUN OR OVEN DRY BECAUSE TOO MUCH HEAT WILL COOK THE NUTRITIONAL VALUE OF THE LEAVES, THUS LOSING ITS POTENCY. PROCEDURE: 1. Boil the 1 liter water in a sauce pan. 2. As soon as it boils, add the leaves and turn the heat to low. 3. Simmer it for 20 minutes. The color will turn to golden brown or just like the color of regular tea. 4. let it cool before drinking. The tea is only good for 7-8 hours and may be refrigerated. * GUYABANO TEA MUST BE TAKEN FOR 30 DAYS, 3 TIMES A DAY, ONE GLASS BEFORE MEALS. THE TEA IS EASILY ABSORBED IN AN EMPTY STOMACH. *It should only be taken for 30 days. More than that, it will destroy the normal flora. *After 30 days, have yourself checked by your doctor to examine if the disease is still there. If the symptoms is still there, taper the dose to maintenance dose. * If the symptoms disappear before the 30 day treatment, continue taking the tea to make sure that no single sick cell is present. 30 day treatment, 3x a day, one glass 30 minutes before meals no skipping. MAINTENANCE DOSE: ONE GLASS OF TEA A DAY 30 MINUTES BEFORE MEALS FOR 5 DAYS EXCEPT SATURDAY OR SUNDAY. HAVE AT LEAST 2 DAYS REST PERIOD A WEEK. ***Dont mix the tea with other healing substances to avoid incompatibility. *** Dont overuse the tea. Follow the procedure. FIGHT CANCER. FIGHT FOR YOUR LIFE MUST.

Sunday, 15 December 2013

Story
एक बेरोजगार आदमी, जिसका नाम प्रतीक था. एक बड़ी company में peon की post के लिए interview देने गया..
उससे कुछ सवाल पूछे गए. और फिर एक practical test लिया गया की, “जाकर चाय लेकर आओ.”
वो test में भी पास हो गया.
उसे उसका email देने के लिए कहा गया. पर उसने जवाब दिया “मेरे पास computer नहीं है. और न ही email है.”
“माफ़ करो.” उस employer ने कहा “अगर तुम्हारे पास email नहीं है. इसका मतलब है तुम्हारा कोई अस्तित्व ही नहीं है. इतनी बड़ी कम्पनी में email के बिना तुम काम नहीं कर सकते. तुम्हे नौकरी नहीं दी जा सकती.”
प्रतीक बहुत निराश हो गया. उसके जेब में केवल 500 रुपये बचे थे.
वो हार नहीं मान सकता था. इसलिए वो दूसरे दिन सुबह सुबह मंडी गया. और वहां से 500 रुपये के टमाटर ख़रीद लाया. पूरा दिन उसने घर घर जाकर टमाटर बेचे. और 300 रुपये का मुनाफ़ा हुआ.
वो हर दिन यही करने लगा. जल्द ही उसने दुसरे काम भी शुरू कर दिए, उसका बहुत मुनाफ़ा होने लगा . एक दूकान ख़रीदी. एक truck ख़रीद लिया. और केवल 5 सालो में प्रतीक की compnay देश की सबसे बड़ी food retailer companies में से एक बन गयी. उसने अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के बारे में सोचा. और एक life insurance भी करवा लिया.
फिर एक दिन एक पत्रकार उसका interview लेने आया. उसने उससे कई सवाल पूछे. और घंटो बातें की.
और आखिर में पत्रकार ने उससे उसका email माँगा.
प्रतीक ने जवाब दिया, “मेरे पास email नहीं है.”
पत्रकार बड़ा हैरान हुआ. उसने प्रतीक से कहा, “क्या आप जानते है की email कितनी ज़रूरी चीज़ है. आप आज इतने सफल है. आप सोच सकते है यदि आपके पास email होता तो आप क्या कर रहे होते, कितने अधिक सफल होते?”
प्रतीक ने कुछ देर सोचा फिर जवाब दिया, “अगर मेरे पास email होता तो मैं एक company में peon की नौकरी कर रहा होता.”
इतना तो हम सभी जानते और मानते की हर किसी के पास सारे साधन resources नहीं हो सकते. पर हमारे पास जितना है उससे हम कितना कुछ कर पाते है सफ़लता के असल मायने इसी में है. 
Health
मटर -- - मटर का मौसम आ गया है. मटर छिलना , उसे साल भर के लिए प्रीजर्व करना आदि काम शुरू हो चुके है. - इसके लिए एक सुझाव है की बच्चों को शाम को टीवी देखते समय मटर छिलने को दे दें. वे बातें करते करते ये काम निपटा डालेंगे और साथ ही साथ ताज़ी मीठी मटर के दाने खाते भी जायेंगे जो उनके लिए बहुत अच्छे है. - सभी छिल्कें एक अखबार के पन्ने में लपेट कर गाय को खिला दें. - मटर त्रिदोष नाशक है; यह मल को बाँधने वाली है. - कच्ची मटर खाने से कब्ज़ दूर होती है। - ये स्त्रियों में माहवारी की रुकावट दूर करता है। - मटर खाने से रक्त और माँस बढ़कर शरीर स्वस्थ होता है। - मटर प्रोटीन का उत्तम साधन है। - शरीर में कहीं भी दाह, जलन हो, हरी मटर पीसकर लेप करें। - एक शोध में पता चला है कि हरी मटर में काउमेस्‍ट्रोल होता है जो कि एक प्रकार का फाइटोन्‍यूट्रीयन्‍ट होता है, अगर शरीर में इसकी संतुलित मात्रा होती है तो कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह भी पता चला है कि अगर आप हर दिन हरी मटर का सेवन करें तो पेट का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। - हरी मटर में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है जिससे हड्डियां मजबूत होती है। यह ऑस्टियोपोरोसिस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है। - हरी मटर में शरीर से ट्राइग्लिसराइड्स के स्‍तर को कम करने का गुण होता है जिससे कोलेस्‍ट्रॉल नियंत्रित रहता है। - इसमें एंटी - इनफ्लैमेटरी कम्‍पाउंड और एंटी - ऑक्‍सीडेंट दोनों भरपूर मात्रा में होते है। जिससे दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है। - हरी मटर उच्‍च फाइबर से भरपूर होती है जिसके सेवन से फैट नहीं बढ़ता है। इसलिए यह वजन घटाने में सहायक है। - हरी मटर के एंटी - ऑक्‍सीडेंट शरीर को चुस्‍त - दुरूस्‍त रखने में सहायक होते है। इसके अलावा, हरी मटर में फ्लैवानॉड्स, फाइटोन्‍यूटिंस, कैरोटिन आदि होते है जो हमें हमेशा जवान और शक्ति से भरपूर बनाएं रखता है। - हरी मटर के नियमित सेवन से भूलने की समस्‍या दूर हो जाती है। - हरी मटर में उच्‍च फाइबर और प्रोटीन तत्‍व होते है जो शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करते है। - भूनी हुई मटर के दाने और नारंगी के छिलकों को दूध में पीसकर उबटन करने से शरीर का रंग निखर जाता है।कुछ दिनों तक चेहरे पर पिसी मटर का उबटन मलते रहने से झांई और धब्बे समाप्त हो जाते है। - यदि जाड़ो के दिनों में उंगलियों सूज जाये तो मटर के दानों का काढ़ा बनाये और थोड़े गर्म काढ़े में कुछ देर उंगलियों डुबोकर रखनी चाहिए अथवा इसके साथ मीठा तेल मिलाकर उंगलियों को धोना चाहिये। - मटर को उबाल कर इस पानी से स्नान करने से शरीर की सूजन दूर होती है. - शाम को यूँ ही कुछ खाने का मन हो तो ताज़ी मटर फलियों को धो कर उन्हें घी जीरे से बघार कर थोड़ा ढक कर पका लें. जब ये फलियाँ पक जाए तो इन्हें छिलके समेत खाए. ये बहुत ही स्वादिष्ट लगती है. - मटर के दाने उबाल कर चाट की तरह खाए जा सकते है. - इसकी कचौड़ियाँ , पराठे आदि भी बनते है. - तो आप किस तरह मटर बनाने वाले है ?

Tuesday, 10 December 2013

Health
There are a number of herbal remedies and home remedies to
get rid of underarm odor
Prepare and drink a glass of sage herbal tea, which is known to reduce your sweat-gland activity,particularly if you tend to perspire heavily when under stress or tension.
Steep two teaspoons of sage in one cup of hot water for 15 minutes, strain and drink once a day or throughout the day.
Wipe your armpits with witch hazel or white vinegar, which helps to deodorize the area. The scent will typically be gone in a few minutes. you can use a cotton ball to apply this.
Use a washcloth to wipe your underarms with apple cider vinegar, which helps to lower the pH levels of the armpit skin. This helps eliminate odor-causing bacteria, which cannot survive the low pH environment.
Use baby powder or baking soda in place of deodorant. Simply apply this to your dry armpits. The powder helps to absorb moisture and also kill bacteria. 
सफलता का रहस्य
एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?
सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो.वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया. लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना.
सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”
लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”
सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.
जीतने वाले कोई अलग काम नही करते, वे उसी काम को अलग ढंग से करते है।

Saturday, 30 November 2013

Story
एक धनी किसान था। उसे विरासत में खूब संपत्ति मिली थी। ज्यादा धन-संपदा ने उसे आलसी बना दिया। वह सारा दिन खाली बैठा हुक्का गुड़गुड़ाता रहता था। उसकी लापरवाही का नौकर-चाकर नाजायज फायदा उठाते थे। उसके सगे-संबंधी भी उसका माल साफ करने में लगे रहते थे। एक बार किसान का एक पुराना मित्र उससे मिलने आया। वह उसके घर की अराजकता देख दुखी हुआ। उसने किसान को समझाने की कोशिश की लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा। एक दिन उसने कहा कि वह उसे एक ऐसे महात्मा के पास ले जाएगा जो अमीर होने का तरीका बताते हैं। किसान के भीतर उत्सुकता जागी। वह महात्मा से मिलने को तैयार हो गया। महात्मा ने बताया, ‘हर रोज सूर्योदय से पहले एक हंस आता है जो किसी के देखने से पहले ही गायब हो जाता है। जो इस हंस को देख लेता है उसका धन निरंतर बढ़ता जाता है।’
अगले दिन किसान सूर्योदय से पहले उठा और हंस को खोजने खलिहान में गया। उसने देखा कि उसका एक संबंधी बोरे में अनाज भरकर ले जा रहा है। किसान ने उसे पकड़ लिया। वह रिश्तेदार बेहद लज्जित हुआ और क्षमा मांगने लगा। तब वह गौशाला में पहुंचा। वहां उसका एक नौकर दूध चुरा रहा था। किसान ने उसे फटकारा। उसने पाया कि वहां बेहद गंदगी है। उसने नौकरों को नींद से जगाया और उन्हें काम करने की हिदायत दी। दूसरे दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ। इस तरह किसान रोज हंस की खोज में जल्दी उठता। इस कारण सारे नौकर सचेत हो गए और मुस्तैदी से काम करने लगे। जो रिश्तेदार गड़बड़ी कर रहे थे वे भी सुधर गए।
जल्दी उठने और घूमने-फिरने से किसान का स्वास्थ्य भी ठीक हो गया। इस प्रकार धन तो बढ़ने लगा, लेकिन हंस नहीं दिखा। इस बात की शिकायत करने जब वह महात्मा के पास पहुंचा तो उन्होंने कहा, ‘तुम्हें हंस के दर्शन तो हो गए, पर तुम उसे पहचान नहीं पाए। वह हंस है परिश्रम। तुमने परिश्रम किया, जिसका लाभ अब तुम्हें मिलने लगा है।’
Health
****ध्यान रहे पथरी के रोगीओं के लिए चूना वर्जित है****
चूना जो आप पान में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर देते है । �
जैसे किसीको पीलिया हो जाये माने जोंडिस उसकी सबसे अछि दावा है चूना ; गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है । और येही चूना नपुंसकता की सबसे अछि दावा है - अगर किसीके शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल देड साल में भरपूर शुक्राणु बन्ने लगेंगे; और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अछि दावा है ये चूना । बिद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अछि है जो लम्बाई बढाती है - गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिलाके खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिलाके खाओ, दाल नही है तो पानी में मिलाके पियो - इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है । जिन बच्चोकी बुद्धि कम काम करती है मतिमंद बच्चे उनकी सबसे अछि दावा है चूना, जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अछे हो जायेंगे । 
बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अछि दावा है चूना । और हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंध हुआ उनकी सबसे अछि दावा है चूना; गेहूँ के दाने के बराबर चूना हरदिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना । 
जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए किउंकि गर्भवती माँ को सबसे जादा काल्सियम की जरुरत होती है और चूना कैल्सियम का सब्से बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फाईदे होंगे - पहला फाईदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नोर्मल डेलीभरी होगा, दूसरा बछा जो पैदा होगा वो बहुत हस्टपुष्ट और तंदरुस्त होगा , तीसरा फ़ायदा वो बछा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया , और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बछा बहुत होसियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है । 
चूना घुटने का दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है , कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है । कई बार हमारे रीड़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दुरी बड़ जाती है Gap आ जाता है - ये चूना ही ठीक करता है उसको; रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चुने से ठीक होता है । अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे जादा चुने में है । चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।
अगर मुह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है , मुह में अगर छाले हो गए है तो चुने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है । शारीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , अनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अछि दावा है ये चूना , चूना पीते रहो गन्ने के रस में , या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में - अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है - एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ।
भारत के जो लोग चुने से पान खाते है, बहुत होसियार लोग है पर तम्बाकू नही खाना, तम्बाकू ज़हर है और चूना अमृत है .. तो चूना खाइए तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चुने का उसमे कत्था मत लगाइए, कत्था कन्सर करता है, पान में सुपारी मत डालिए सोंट डालिए उसमे , इलाइची डालिए , लोंग डालिए. केशर डालिए ; ये सब डालिए पान में चूना लगाके पर तम्बाकू नही , सुपारी नही और कत्था नही ।
अगर आपके घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हाड़सिंगार के पत्ते का काड़ा खाइए घुटने बहुत अछे काम करेंगे । राजीव भाई कहते है चूना खाइए पर चूना लगाइए मत किसको भी ..ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है ; आजकल हमारे देश में चूना लगाने वाले बहुत है पर ये भगवान ने खाने के लिए दिया है ।
डेंगू का उपचार
आजकल डेंगू एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है, पुरे भारत में ये बड़ी तेजी से बढ़ता ही जा रहा है जिससे कई लोगों की जान जा रही है l यह एक ऐसा वायरल रोग है जिसका माडर्न मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है और वो इतना सरल और सस्ता है कि उसे कोई भी कर सकता है l तीव्र ज्वर, सर में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द होना, उल्टियाँ लगना, त्वचा का सुखना तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी सकती है l यदि आपके आस-पास किसी को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चार चीज़ें रोगी को दें : १) अनार जूस २) गेहूं घास रस ३) पपीते के पत्तों का रस ४) गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है l - पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी l - गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर "गिलोय घनवटी" ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें l यदि बुखार १ दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें l यदि रोगी बार बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नीम्बू मिला कर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी l ये रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है तब भी यह चीज़ें रोगी को बिना किसी डर के दी जा सकती हैं l डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है l 
Humorous Story
एक प्रेरक कहानी.. एक लड़के को सेल्समेन के इंटरव्यू में इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती थी। लड़के को अपने आप पर पूरा भरोसा था । उसने मैनेजर से कहा कि आपको अंग्रेजी से क्या मतलब ?? यदि मैं अंग्रेजी वालों से ज्यादा बिक्री न करके दिखा दूं तो मुझे तनख्वाह मत दीजिएगा। मैनेजर को उस लड़के बात जम गई। उसे नौकरी पर रख लिया गया। फिर क्या था, अगले दिन से ही दुकान की बिक्री पहले से ज्यादा बढ़ गई। एक ही सप्ताह के अंदर लड़के ने तीन गुना ज्यादा माल बेचकर दिखाया। स्टोर के मालिक को जब पता चला कि एक नए सेल्समेन की वजह से बिक्री इतनी ज्यादा बढ़ गई है तो वह खुद को रोक न सका । फौरन उस लड़के से मिलने के लिए स्टोर पर पहुंचा। लड़का उस वक्त एक ग्राहक को मछली पकड़ने का कांटा बेच रहा था। मालिक थोड़ी दूर पर खड़ा होकर देखने लगा। लड़के ने कांटा बेच दिया। ग्राहक ने कीमत पूछी। लड़के ने कहा - 800 रु. । यह कहकर लड़के ने ग्राहक के जूतों की ओर देखा और बोला - सर, इतने मंहगे जूते पहनकर मछली पकड़ने जाएंगे क्या ? खराब हो जाएंगे। एक काम कीजिए, एक जोड़ी सस्ते जूते और ले लीजिए। ग्राहक ने जूते भी खरीद लिए। अब लड़का बोला - तालाब किनारे धूप में बैठना पड़ेगा। एक टोपी भी ले लीजिए। ग्राहक ने टोपी भी खरीद ली। अब लड़का बोला - मछली पकड़ने में पता नहीं कितना समय लगेगा। कुछ खाने पीने का सामान भी साथ ले जाएंगे तो बेहतर होगा। ग्राहक ने बिस्किट, नमकीन, पानी की बोतलें भी खरीद लीं। अब लड़का बोला - मछली पकड़ लेंगे तो घर कैसे लाएंगे। एक बॉस्केट भी खरीद लीजिए। ग्राहक ने वह भी खरीद ली। कुल 2500 रु. का सामान लेकर ग्राहक चलता बना। मालिक यह नजारा देखकर बहुत खुश हुआ । उसने लड़के को बुलाया और कहा - तुम तो कमाल के आदमी हो यार ! जो आदमी केवल मछली पकड़ने का कांटा खरीदने आया था उसे इतना सारा सामान बेच दिया ? लड़का बोला - कांटा खरीदने ? अरे वह आदमी तो केयर फ्री सेनिटरी पैक खरीदने आया था । मैंने उससे कहा अब चार दिन तू घर में बैठा बैठा क्या करेगा । जा के मछली पकड़ " ये सुनकर स्टोर मालिक बहुत खुश हुआ और लडके को सम्मानित किया । Moral....आप ये न सोचे कि आप किसी क्षेत्र मेँ कमजोर है तो कुछ नही कर सकते । दिमाग से काम लोगे तो कामयाबी आपके कदम चूमने लगेगी ।


Health
पथरी (किडनी / गल ब्लैडर) का आयुर्वेदिक उपचार :-
एक पौधा होता है जिसे हिंदी मे पत्थरचट्टा, पाषाणभेद, पणफुट्टी, भष्मपथरी कहते है, फोटो देखे निचे ... इसका वैज्ञानिक नाम है "bryophyllum pinnatum" !
सेवन की विधि : दो पत्ते तोड़े, उसको अच्छी तरह पानी से धोने के बाद सुबह सुबह खाली पेट चबा कर खाले, हलके गरम पानी के साथ !
एक हफ्ते के अन्दर पथरी विघटित हो कर शरीर से निकल जाएगी






आज कौनसी सब्जी बनी है ? तुम्हारी मनपसंद ! लौकी ??? अवश्य खाना चाहिए थोड़ी ही क्यों ना हो . ये हमारा कई बार होने वाला वार्तालाप है. लौकी काटते समय थोड़ी लौकी कच्ची ही खा ले. ये बहुत मीठी लगती है. लौकी कद्दूकस करने पर उससे निकला पानी पी जाएँ. क्योंकि इसके बहुत लाभ है --- - लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्यवर्ध्‍दक, पित्‍त तथा कफनाशक और धातु को पुष्‍ट करने वाली होती है। - हैजा होने पर 25 एमएल लौकी के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। इससे मूत्र बहुत आता है। - खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। - हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्‍चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। - लौकी में श्रेष्‍ठ किस्‍म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है। - लौकी श्‍लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्‍छी मात्रा में मिलती है। - लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करते है तथा हृदय को शक्‍ति देते है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी स्‍वस्‍थ बनाते है। - लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है। - अल्सर होने पर कुछ दिन सिर्फ लौकी खाने से यह ठीक हो जाता है. - लौकी के रस को सीसम के तेल के साथ मिलाकर तलवों पर हल्की मालिश सुखपूर्वक नींद लाती है। -लौकी का रस मिर्गी और अन्य तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित बीमारियों में भी फायदेमंद है। -अगर आप एसिडीटी,पेट क़ी बीमारियों एवं अल्सर से हों परेशान, तो न घबराएं बस लौकी का रस है इसका समाधान। - केवल पर्याप्त मात्रा में लौकी क़ी सब्जी का सेवन पुराने से पुराने कब्ज को भी दूर कर देता है। - लौकी मस्तिष्क की गर्मी को दूर करती है।लौकी का रायता दस्तों में लाभप्रद है। - यकृत की बीमारी और पीलिया के लिये लौकी लाभकारी है। - लौकी के पत्तों को पीसकर लेप करने से कुछ ही दिनों में बवासीर नष्ट हो जाते हैं। - लौकी के छिलके से चेहरा साफ करने से चेहरे की गंदगी दूर होती है। त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं। चेहरे पर मुंहासे हों तो, इन मुहांसों पर लौकी और नींबू के रस का मिश्रण लगाएं। इससे आपको जरूर लाभ मिलेगा। -गर्मियों में लौकी को पीसकर पैर के तलवों पर मलें इससे पैरों की जलन शांत होती है। - लौकी के बीजों को पीसकर होठों पर लगाने से जीभ और होठों के छाले ठीक हो जाते हैं। - दमा या अस्थमा के लिए ताजी लौकी पर गीला आटा लेप लें, फिर उसे साफ कपडे़ में लपेटकर, भूभल (गर्म राख या रेत) में दबायें। आधे घंटे बाद कपड़ा और आटा उतारकर उस भुरते का रस निकालकर सेवन करें। लगभग 40 दिनों में इस रोग से छुटकारा मिल जाएगा। - बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लौकी पीसकर लेप करें और इसका रस निकालकर पिलाएं। इससे बिच्छू का जहर उतर जाता है। - कच्चे लौकी को काटकर उसकी लुगदी बनाकर घुटनों पर रखकर कपड़े से बांध लेना चाहिए। इससे घुटने का दर्द दूर हो जायेगा। - सिर्फ एक सावधानी बरते की लौकी कडवी होने पर उसका उपयोग ना करें . 



सर्दियों में सिंघाड़े खाने के हैं ये फायदे: -----मौसमी फलों में कई बीमारियों से बचाव और उपचार के तरीके छिपे होते हैं। सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है और इस मौसम का एक खास फल है सिंघाड़ा। हरे, गुलाबी और भूरे रंगों में आने वाला यह फल सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसका आटा भी बाजार में मिलता है। इसे कच्चा खाकर सर्दियों में खुद को दुरुस्त रखने में आपको काफी मदद मिल सकती है। पोषक तत्व - सिघाड़े में साइट्रिक एसिड, एमिलोज, कार्बोहाइड्रेट, बीटा-एमिलेज, प्रोटीन, फैट, थायमाइन, विटामिन्स-ए, सी, मैगनीज तथा फास्फोराइलेज पाए जाते हैं। वजन घटाने के ल‌िए - पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा और बेहद कम कैलोरी होने के कारण स्वस्थ जीवनशैली के लिए सिंघाड़ा एक बेहतरीन फल है। पीलिया में फायदेमंद - डिटॉक्सिफाइंग गुणों के कारण इसे पीलिया ग्रस्त लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। पीलिया के मरीज इसे कच्चा या जूस बनाकर ले सकते हैं। यह शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में काफी मददगार होता है। पानी की भरपाई - सर्दियों में होने वाली डिहाइड्रेशन को दूर करने में सिंघाड़ा काफी लाभदायक है। इसके अलावा यह शरीर के लिए एक बेहतरीन कूलेंट का भी काम करता है। इसके अलावा यह दस्त रोकने में भी काफी प्रभावी है। थायरॉइड का उपचार - मैग्नीज और आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होने के कारण यह थायरॉइड ग्रंथि की कार्यशैली को सुचारू रखने में भी मदद करता है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर - पॉलीफिनॉलिक और फ्लेवेनॉइड एंटीऑक्सिडेंट्स की पर्याप्त मात्रा के कारण सिंघाड़े में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटी-कैंसर और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण भी होते हैं।





Tuesday, 26 November 2013

मांसपेशियों के दर्द से परेशान तो नहीं हैं? -----
मांसपेशियों में खिंचाव तभी होता है, जब उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है। आप एक्सरसाइज करने के अभ्यस्त नहीं हैं, दौड़ना भी आपकी दिनचर्या में नहीं है, माउंटेन क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों से भी दूर रहते है, लेकिन अचानक आपको ऐसा कुछ करना पड़े, तो मांसपेशियां जवाब दे जाती हैं। उनमें असहनीय दर्द होने लगता है। कई बार सामान्य दिनचर्या में भी मांसपेशियां में खिंचाव हो सकता है। राह चलते हुए टखने का मुड़ जाना इसी का एक उदाहरण कहा जा सकता है। यहां ऐसे कुछ नुस्खे दिए जा रहे हैं, जिन्हें आजमाकर आपको दर्द से राहत मिल सकती है। चहलकदमी करें- मांसपेशियों में दर्द हो, तो बिस्तर से उठने का मन नहीं करता, लेकिन ऐसे में आराम करने से अच्छा होगा कि थोड़ी चहलकदमी की जाए। गहरी सांस लीजिए और दोनों हाथों को सीधा ऊपर उठाएं। यह प्रकिया कई बार दोहराएं। ऐसा करने से आपकी मांसपेशियों में रक्त प्रवाह में सुधार होता है, जिससे आप रिलैक्स महसूस करेंगे। मसाज- मांसपेशियों में खिंचाव या झटका लगने से वो सिकुड़ जाती हैं, जिससे उनमें रक्त प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता। सही तरीके से दर्द वाली जगह पर मसाज करने से भी राहत मिलती है। इससे रक्त प्रवाह में सुधार होता है। थकान भरी शारीरिक गतिविधियों के बाद ग्लाइकोजेन के ग्लूकोज में परिवर्तित होने की प्रक्रिया के दौरान बॉडी एनर्जी को बर्न करती है। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी से भी मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हो सकती है। स्ट्रेचिंग- यह सही है कि मांसपेशियों में दर्द हो, तो हिलना-डुलना मुश्किल होता है, लेकिन जितना आप सहन कर सकें, मसल्स को आराम से स्ट्रेच करें। ऐसा 30 मिनट करना चाहिए। इससे भी दर्द में राहत मिलती है। खूब पानी पिएं- एक्सरसाइज करते वक्त या फिर किसी दूसरी शारीरिक गतिविधि में खूब पसीना निकलता है। कैफीन उत्पादों और अल्कोहल के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इससे डिहाइड्रेशन हो सकता है। प्रोटीन- भारी-भरकम शारीरिक गतिविधियों के बाद मसल्स को प्रोटीन की जरूरत होती है, ताकि शरीर में एनर्जी का स्तर बना रहे। ऐसे में प्रोटीनयुक्त नेचुरल खाद्य उत्पादों का सेवन करना चाहिए।




Thursday, 31 October 2013

कुछ रोचक तथ्य-:

=>सिर्फ एक घंटा हेडफोन लगाने से हमारे
कानो में जीवाणुयों की तादाद 700 गुना बढ़
जाती है.

=>पूरे जीवन काल के दौरान नीद में आप
भिन्न-भिन्न तरह के 70 कीट और 10
मकडीयाँ खा जाते है.

=>आपका दिल एक दिन में लगभग 100,000
बार धडकता है.

=>आप के शरीर की लगभग 25
फीसदी हड़डियाँ आप के पैरों में होती हैं.

=>ऊगलियों के नाखुन पैरों के नाखुनों से 4
गुना ज्यादा जलदी बढ़ते हैं.

=>आप 300 हड़डियों के साथ जन्म लेते है., पर 18 साल तक होतो-होते आप
की हड़डियाँ जुड़ कर 206 रह जाती हैं.

=>एक औसतन ईन्सान दिन में 10 बार
हसता है.





Story


एक आदमी जंगल से गुजर रहा था । उसे चार स्त्रियां मिली।
💠
उसने पहली से पूछा - बहन तुम्हारा नाम क्या हैं ?
उसने कहा "बुद्धि "
तुम कहां रहती हो?
मनुष्य के दिमाग में।
💠
दूसरी स्त्री से पूछा - बहन तुम्हारा नाम क्या हैं ?
" लज्जा "।
तुम कहां रहती हो ?
आंख में ।
💠
तीसरी से पूछा - तुम्हारा क्या नाम हैं ?
"हिम्मत"
कहां रहती हो ?
दिल में ।
💠
चौथी से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
"तंदुरूस्ती"
कहां रहती हो ?
पेट में।
वह आदमी अब थोडा आगे बढा तों फिर उसे चार पुरूष मिले।
💠
उसने पहले पुरूष से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
" क्रोध "
कहां रहतें हो ?
दिमाग में,
दिमाग में तो बुद्धि रहती हैं,
तुम कैसे रहते हो?
जब मैं वहां रहता हुं तो बुद्धि वहां से विदा हो जाती हैं।
💠
दूसरे पुरूष से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
उसने कहां -" लोभ"।
कहां रहते हो?
आंख में।
आंख में तो लज्जा रहती हैं तुम कैसे रहते हो।
जब मैं आता हूं तो लज्जा वहां से प्रस्थान कर जाती हैं ।
💠
तीसरें से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
जबाब मिला "भय"।
कहां रहते हो?
दिल में तो हिम्मत रहती हैं तुम कैसे रहते हो?
जब मैं आता हूं तो हिम्मत वहां से नौ दो ग्यारह हो जाती हैं।
💠
चौथे से पूछा तुम्हारा नाम क्या हैं?
उसने कहा - "रोग"।
कहां रहतें हो?
पेट में।
पेट में तो तंदरूस्ती रहती हैं,
जब मैं आता हूं तो तंदरूस्ती वहां से रवाना हो जाती हैं।
💠
जीवन की हर विपरीत परिस्थिथि में यदि हम उपरोक्त वर्णित बातो को याद रखे तो कई चीजे टाली जा सकती है.




Health

रोज खाएं एक गाजर --------
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गाजर को पौष्टिक आहार माना जाता है। इसे कच्चा भी खाया जा सकता है और पकाकर भी। यह शरीर को जरूरी एंजाइम, विटामिन और खनिज प्रदान करता है। एक गाजर पूरे दिन की विटामिन ए की आवश्यकता को पूरा करता है। यह ऊर्जा प्रदान करने के साथ हड्डियों, आंखों की दृष्टि और त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। इसका जूस भी काफी लाभकारी होता है। ताजा गाजर का जूस पीने से तनाव और थकान से मुक्ति मिलती है।


गाजर जितना लाल होगा उसमें उतना ज्यादा कैरोटिनायड (विटामिन ए का स्रोत्र) मिलेगा। प्रत्येक 100 ग्राम गाजर में 7.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.6 ग्राम प्रोटीन, 0.3 ग्राम वसा, 30 मिग्रा कैल्शियम, 0.6 मिग्रा आयरन पाया जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन बी1, बी2, बी6, विटामिन सी, के और पोटेशियम भी पाया जाता है।


पूर्व में हुए शोधों के मुताबिक गाजर में प्रचुर मात्रा में फोलिक एसिड पाया जाता है। यह कैंसर से लड़ने में मददगार होता है। साथ ही कोलेस्ट्राल, हार्टअटैक का खतरा काफी कम हो जाता है।


गाजर के फायदे ---

हृदय रोग से बचाव : ईडनबर्ग के वोल्फसन गैस्ट्रोइन्टेस्टेटाइनल लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं के मुताबिक लगातार तीन हफ्तों तक 207 मिली गाजर के जूस के सेवन से11 प्रतिशत कोलेस्ट्राल के स्तर को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक गाजर खाने वालों को हार्टअटैक पड़ने का खतरा न खाने वाले के मुकाबले एक तिहाई कम होता है।


कैंसर से बचाव : इसमें पाया जाने वाला बीटाकैरोटीन कई प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करता है। ब्रिटिश शोधकर्ताओं के मुताबिक बीटा कैरोटीन लेने से फेफड़ों काकैंसर करीब 40 प्रतिशत और आंत का कैंसर होने का खतरा 24 प्रतिशत तक कम हो जाता है। यही नहीं गाजर खाने वाली महिलाओं को उन महिलाओं के मुकाबले स्तन कैंसर होने का खतरा आठ गुना कम हो जाता है जो बिल्कुल गाजर नहीं खाती।


आंखों के लिए फायदेमंद : गाजर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह आंखों के लिए फायदेमंद होता है। इससे आंखों की दृष्टि में सुधार होता है।


स्ट्रोक से बचाव : वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रतिदिन एक गाजर खाने से स्ट्रोक का खतरा 68 प्रतिशत कम हो जाता है।




गुलाब के पौधे से हमें जीवन के गुर सीखने मिलते हैं ,,,,,,,,गुलाव में कांटे अनेक होते है उनकी तुलना में फूल कम ,,,,,,गुलाब का फूल जब काँटों के एकदम नजदीक होता है तब कलि बन सिमटा रहता है स्वयं को समेटे ,,,अपने को सुरक्षित करते ,,,लेकिन धीरे धीरे जब काँटों से दूर होता जाता है तब जाकर पूरा खिल जाता है ,,ऐसे ही जब हम विपरीत परस्तिथि में हों तो स्वयं के विस्तार को समेट लें ,,जीवन में दोनों हैं हमें चुनना है ,,हम काँटों सा जीवन चुने या फूल सा ,,,,फूल अपने अस्तित्व के कारण लोगों द्वारा चुना जाता है ,जबकि कांटे कोई चुनना भी नहीं चाहता ,,,हालाँकि काँटों के बीच ही गुलाब की पहचान है 





घरेलू नुस्खों से दूर करें दर्द -
जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसमें सिरदर्द होना एक आम बात है। लेकिन यह दर्द हमारी दिनचर्या में शामिल हो जाए तो हमारे लिए बहुत कष्टदायी हो जाता है। दर्द से छुटकारा पाने के लिए हम पेन किलर घरेलू उपाय अपनाकर इसे दूर कर सकते हैं। इन घरेलू उपायों के कोई साईड इफेक्ट भी नहीं होते।
1. अदरक: अदरक एक दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करती है। यदि सिरदर्द हो रहा हो तो सूखी अदरक को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने माथे पर लगाएं। इसे लगाने पर हल्की जलन जरूर होगी लेकीन यह सिरदर्द दूर करने में मददगार होती है।
2. सोडा: पेट में दर्द होने पर कप पानी में एक चुटकी खाने वाला सोडा डालकर पीने से पेट दर्द में राहत मिलती है। सि्त्रयो के मासिक धर्म के समय पेट के नीचे होने वाले दर्द को दूर करने मे खाने वाला सोडा पानी में मिलाकर पीने से दर्द दूर होता है। एसिडिटी होने पर एक चुटकी सोडा, आधा चम्मच भुना और पिसा हुआ जीरा, 8 बूंदे नींबू का रस और स्वादानुसार नमक पानी में मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है।
3. अजवायन: सिरदर्द होने पर एक चम्मच अजवायन को भूनकर साफ सूती कपडे में बांधकर नाक के पास लगाकर गहरी सांस लेने से सिरदर्द में राहत मिलती है। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक आपका सिरदर्द ठीक नहीं हो जाता। पेट दर्द को दूर करने में भी अजवायन सहायक होती है। पेट दर्द होने पर आधा चम्मच अजवायन को पानी के साथ फांखने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
4. बर्फ : सिरदर्द में बर्फ की सिंकाई करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा स्पॉन्डिलाइटिस में भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है। गर्दन में दर्द होने पर भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है।
5. हल्दी: हल्दी कीटाणुनाशक होती है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए गए हैं। ये तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है। एक चम्मच हल्दी में आधा चम्मच काला गर्म पानी के साथ फांखने से पेट दर्द व गैस में राहत मिलती है।
6. तुलसी के पत्ते: तुलसी में बहुत सारे औषधीय तत्व पाए जाते हैं। तुलसी की पत्तियों को पीसकर चंदन पाउडर में मिलाकर पेस्ट बना लें। दर्द होने पर प्रभावित जगह पर उस लेप को लगाने से दर्द में राहत मिलेगी। एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर हल्का गुनगुना करके खाने से गले की खराश और दर्द दूर हो जाता है। खांसी में भी तुलसी का रस काफी फायदेमंद होता है।
7. मेथी: एक चम्मच मेथी दाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांखने से पेटदर्द में आराम मिलता है। मेथी डायबिटीज में भी लाभदायक होती है। मेथी के लड्डू खाने से जोडों के दर्द में लाभ मिलता है।
8. हींग: हींग दर्द निवारक और पित्तवर्द्धक होती है। छाती और पेटदर्द में हींग का सेवन लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर पकाने और उसे बच्चो की नाभि के चारो ओर उसका लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।
9. सेब: सुबह खाली पेट प्रतिदिन एक सेब खाने से सिरदर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। चिकित्सकों का मानना है कि सेब का नियमित सेवन करने से रोग नहीं घेरते।
10. करेला: करेले का रस पीने से पित्त में लाभ होता है। जोडों के दर्द में करेले का रस लगाने से काफी राहत मिलती है।






Caution on Taj Expressway
आजकल नए बने ताज एक्सप्रेस वे पर रोजाना गाड़ियों के टायर फटने के मामले सामने आ रहे हैं जिनमें रोजाना कई लोगों की जानें जा रही हैं.
एक दिन बैठे बैठे मन में प्रश्न उठा कि आखिर देश की सबसे आधुनिक सड़क पर ही सबसे ज्यादा हादसे क्यूँ हो रहे हैं? और हादसों का तरीका भी केवल एक ही वो भी टायर फटना ही मात्र, ऐसा कोन सी कीलें बिछा दीं सड़क पर हाईवे बनाने वालों ने?
दिमाग ठहरा खुराफाती सो सोचा आज इसी बात का पता किया जाये. तो टीम जुट गई इसका पता लगाने में.
अब सुनिए हमारे प्रयोग के बारे में.
मेरे पास तो इको फ्रेंडली हीरो जेट है सो इतनी हाई-फाई गाडी को तो एक्सप्रेस वे अथोरिटी इजाजत देती नहीं सो हमारे एडमिन पेनल की दूसरी कुराफाती हस्ती को मैंने बुला लिया उनके पास BMW X1 SUV है
(ध्यान रहे असली मुद्दा टायर फटना है)
सबसे पहले हमनें ठन्डे टायरों का प्रेशर चेक किया और उसको अन्तराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ठीक किया जो कि 25 PSI है. (सभी विकसित देशों की कारों में यही हवा का दबाव रखा जाता है जबकि हमारे देश में लोग इसके प्रति जागरूक ही नहीं हैं या फिर ईंधन बचाने के लिए जरुरत से ज्यादा हवा टायर में भरवा लेते हैं जो की 35 से 45 PSI आम बात है).
खैर अब आगे चलते हैं.
इसके बाद ताज एक्सप्रेस वे पर हम नोएडा की तरफ से चढ़ गए और गाडी दोडा दी. गाडी की स्पीड हमनें 150 - 180 KM /H रखी. इस रफ़्तार पर गाडी को पोने दो घंटे दोड़ाने के बाद हम आगरा के पास पहुँच गए थे. आगरा से पहले ही रूककर हमने दोबारा टायर प्रेशर चेक किया तो यह चोंकाने वाला था. अब टायर प्रेशर था 52 PSI .
अब प्रश्न उठता है की आखिर टायर प्रेशर इतना बढ़ा कैसे सो उसके लिए हमने थर्मोमीटर को टायर पर लगाया तोटायर का तापमान था 92 .5 डिग्री सेल्सियस.
सारा राज अब खुल चुका था, कि टायरों के सड़क पर घर्षण से तथा ब्रेकों की रगड़ से पैदा हुई गर्मी से टायर के अन्दर की हवा फ़ैल गई जिससे टायर के अन्दर हवा का दबाव इतना अधिक बढ़ गया. चूँकि हमारे टायरों में हवा पहले ही अंतरिष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थी सो वो फटने से बच गए. लेकिन जिन टायरों में हवा का दबाव पहले से ही अधिक (35 -45 PSI) होता है या जिन टायरों में कट लगे होते हैं उनके फटने की संभावना अत्यधिक होती है.
अत : ताज एक्सप्रेस वे पर जाने से पहले अपने टायरों का दबाव सही कर लें और सुरक्षित सफ़र का आनंद लें. मेरी एक्सप्रेस वे अथोरिटी से भी येविनती है के वो भी वाहन चालकों को जागरूक करें ताकि यह सफ़र अंतिम सफ़र न बने.




तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है. ये हैं उसके तरीके:-
1 – तनाव को पहचानें - यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं उन्हें यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करने के उपाय करना आसान हो जायेगा. स्वयं को दस मिनट दें और सोचें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितने बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ, बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बनाती हैं? टॉप 10 की एक लिस्ट बनायें और देखें कि क्या आप उनमें कुछ परिवर्तन ला सकते हैं या नहीं. एक-एक करके उन्हें सुधारते जाएँ और प्रयासरत रहें.
2 – अनावश्यक संकल्पों को छोड़ दें - हम अपने जीवन में कई सारे संकल्प करते हैं – हमें यह करना है – हमें वह करना है. पत्नी, बच्चे, कामकाज, घर-गृहस्थी, समाज, धर्म, शौक, और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े कई सारे संकल्पों को हम पूरा करने में लगे रहते हैं. इनमें से प्रत्येक की समीक्षा करें. क्या ऐसा कुछ है जो अच्छे परिणाम की अपेक्षा तनाव देता है. इस कार्य को निर्ममतापूर्वक करने की ज़रुरत है. जो कुछ भी आपके शुख-शांति के रास्ते में आता है उसे बेवज़ह ढोने में कोई तुक नहीं है. उस संकल्प को पहले दूर करें जो ज्यादा तनाव देता हो.
3 – टालमटोल करने की प्रवृत्ति छोडें - हम सभी ऐसा करते हैं. इसके कारण काम का दबाव बढ़ता जाता है. ‘अभी ही करना है’ की आदत डाल लें. अपने इनबॉक्स और टेबल को साफ़ रखें.
4 – व्यवस्था लायें - कुछ हद तक सभी व्यक्ति अव्यवस्था के बीच रहते हैं. यदि हम व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास करें और इसमें प्रारंभ में सफल हो भी जाएँ तो भी अव्यवस्था को जगह बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. अपने माहौल में अव्यवस्था रखने से तनाव बढ़ता है. इससे हमें चीज़ें तलाशने में देर लग जाती है और कामकाज में बाधा आती है. अपने परिवेश में व्यवस्था लायें. शुरुआत अपनी टेबल और दराज़ से करें. घर के किसी एक कोने से शुरुआत करें. पूरे घर को दुरुस्त करना ठीक न होगा. छोटे से हिस्से से शुरुआत करें और व्यवस्था को वहां से आगे फैलने दें.
5 – जल्दी उठें - देर से उठना कई परेशानियों की जड़ है. किसी दिन 15 मिनट देर से उठें तो पाएंगे की रोजमर्रा के सभी काम करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कामकाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. जल्दी उठने की आदत डालें. इसी के साथ जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए. काम पर जल्दी निकालने से आप ट्रेफिक की समस्या से बच जाते हैं और ड्राइविंग में मज़ा भी आता है. यह जांचें की आपको तैयार होने में कितना समय लगता है और कहीं पहुँचने में कितना समय लगता है. इस समय को कम करके न आंकें. एक छोटा सा अंतराल भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सिर्फ दस मिनट का परिवर्तन लाकर देखें. आपको फर्क पता चलेगा.
6 – दूसरों को नियंत्रित न करें - याद रखें, हम सारी दुनिया के मालिक नहीं हैं. हम चाहते तो हैं कि ऐसा होता लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम ऐसा ख्याल ही अपने मन में पाल लें. हम चीज़ों और लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं और इसमें सफल नहीं हो पाते. इससे तनाव बढ़ता ही है. दूसरी चीज़ें जैसी घटित होती हैं और दूसरे लोग जैसे काम करते हैं उसे स्वीकार कर लें. यह भी स्वीकार कर लें कि अलग-अलग परिस्थितियों में चीज़ें एक ही तरह से नहीं होतीं. धयान रखें, आप केवल स्वयं पर ही नियंत्रण रख सकते हैं. इसीलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले स्वयं को काबू में रखने का काम करें. यह भी सीखें कि स्वयं पर काम थोपने के बजाय आप दूसरों से भी उसे करवा सकते हैं. हममें दूसरों को अपने अधीन रखने कि अदम्य इच्छा होती है. इससे बचने में ही हमारी भलाई है. यह जीवन को तनावमुक्त रखता है.
7 – मल्टीटास्किंग बंद करें - मल्टीटास्किंग का अर्थ है एक साथ कई काम करना, जैसे कम्प्युटर कर लेता है. कई लोग इसे बहुत बड़ा गुण समझते हैं लेकिन हकीकत में इसके नुकसान अधिक हैं. यह हमारी काम करने की गति को सुस्त और बाधित कर देता है. इससे काम के ज़रूरी पक्षों से ध्यान हट भी सकता है. यह तनाव बढ़ाता है. एक वक़्त में एक ही काम करें.
8 – ऊर्जा का क्षय रोकें - यदि आपने पहली स्टेप में बताये अनुसार तनाव उत्पन्न करनेवाले कारणों की पहचान की है तो आपने शायद ऐसे काम भी नोट किये होंगे जो आपकी ऊर्जा को सिर्फ नष्ट करते हैं. कुछ काम ऐसे होते हैं जिनमें दूसरे कामों कि अपेक्षा ज्यादा ऊर्जा और समय लगता है. उन्हें पहचानें और हटायें. जिंदगी बेहतर जीने के लिए भरपूर ऊर्जा का होना जरूरी है.
9 – मुश्किल लोगों से दूर रहें - क्या आप उन्हें जानते हैं? ये लोग हैं आपके बौस, कलीग, कस्टमर, दोस्त, परिजन, आदि. कभी-कभी ये ही हमारी ज़िन्दगी को मुश्किल बना देते हैं. उनसे लड़ना ठीक न होगा इसलिए उन्हें टालने में ही भलाई है.
10 – सरलीकरण करें - अपनी दिनचर्या को सरल-सहज करना बहुत ज़रूरी है. अपने संकल्प, सूचना-व्यवस्था, आवास और कार्यस्थल, और जीवन में घटित हो रही बातों को सरल बनाना ज़रूरी है. इसके अच्छे परिणाम होते हैं. इसके लिए इसी ब्लौग पर कुछ और लेखों में सुझाव बताये गए हैं.
11 – स्वयं को समय दें - स्वयं को थोडा अधिक समय देने का प्रयास करें. ज़रूरी नहीं है कि हर काम घड़ी देखकर किया जाए. समय की कमी हो तो मीटिंग टाल दें. यदि फोन या ई-मेल से बात बनती हो तो मिलने की क्या ज़रुरत है? यदि यह संभव न हो तो मीटिंग का कोई वक़्त फिक्स न करें. लोगों से कहें कि वे आपको फोन करके पूछ लें कि आप फ्री हैं या नहीं. इस तरह कभी-कभार बचने वाले थोड़े-थोड़े समय को स्वयं को देने में या पसंदीदा काम करने में लगायें.
12 – धीरे करें - आपाधापी में लगे रहने के बजाय थोडी कम रफ़्तार से काम करने में चीज़ें बेहतर तरीके से होती हैं. आननफानन टाइप करके बाद में गलतियाँ सुधारने से बेहतर है कि धीरे टाइप करें. खाने का लुत्फ़ उठायें, लोगों से मन बहलायें, दुनिया देखें. तनाव दूर करने में यह टिप बड़ी कारगर है.
13 – दूसरों की मदद करें - यह टिप विरोधाभासी नहीं है. यह न सोचें कि आप तो वैसे ही काम के बोझ तले दबे हुए हैं और दूसरों कि मदद करके तो आपका कचूमर ही नक़ल जायेगा. दूसरों की मदद करने से, स्वयंसेवक के बतौर काम करने से, या चैरिटी संगठन में काम करने से आप भीतर से बहुत अच्छा अनुभव करते हैं और यह आपका तनाव दूर करता है. यदि आप दूसरों पर नियंत्रण ही करना जानते हैं तो यह आपके लिए कुछ मुश्किल होगा. यदि आप इसे बहुत सरसरे तरीके से करते हैं तो इसका लाभ आपको न मिलेगा. इसे सहजता और सद्भावना से करें. दूसरों का जीवन बेहतर होगा तभी आपका जीवन बेहतर बनेगा.
14 – ज़रा सा आराम करते चलें - कामकाज के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना सही रहता है. यदि आप दो घंटों से काम में भिडे हुए हैं तो जरा ठहरें. अपने कन्धों और बांहों को आराम देने के लिए फैलाएं. टहलें, पानी पियें. बाहर जाएँ, खुला आसमान देखें, ताजी हवा में साँस लें. किसी से बात करें. रचनात्मकता अच्छी बात है लेकिन जीवन उससे ज्यादा कीमती है. अपनी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी थोड़ा नियंत्रण रखें.
15 – काम छोड़ दें - यह भयावह टिप है. इसे कर पाना सबके बस की बात नहीं है. सच कहूँ तो आपका कामकाज या नौकरी आपके तनाव का सबसे बड़ा कारण है. यदि आपको आर्थिक मोर्चे पर कुछ सुरक्षा हासिल है तो ज़रा सोचें – क्या आप नौकरी के बदले कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आप सदैव करना चाहते थे. यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो आपके जीवन में एड़ी से चोटी तक परिवर्तन आ जायेगा. केवल यही टिप आपका तनाव ९०% तक कम कर सकती है. इसे यूँ ही टालने की बजाय गंभीरता से लें – शायद ऐसी कई संभावनाएं हों जिनकी ओर आपका ध्यान नहीं गया हो.
16 – ज़रूरी कामों की लिस्ट बनायें - क्या इसके बारे में भी विस्तार से बताना पड़ेगा? ज़रूरी कामों को प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए एक लिस्ट बना लेना चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए.
17 – कसरत करना - इसके कई लाभ हैं. शारीरिक और मानसिक स्तर पर यह बहुत प्रभावशील है. यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ तनाव से भी कुशलता से निपटती है. एक स्वस्थ और फिट व्यक्ति थकान और दबाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है. दूसरी ओर, अस्वस्थ होना स्वयं में बहुत बड़ा घाटा है. कसरत हमें रोग और तनाव से दूर रखती है.
18 – अच्छा खाएं - यह कसरत करने जितना, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. सम्यक, संतुलित, और सात्विक आहार शरीर और मन को पुष्ट करता है. तला हुआ चटपट खाना हाजमे को ख़राब करता है और शरीर को बोझिल बनाता है.
19 – आभारी बनें - यदि आप दूसरों का आभार व्यक्त करते हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम होते हैं. आपके जीवन से ऋणात्मक सोच बाहर निकलती है. दूसरे भी आपकी इस क्रिया से अच्छा अनुभव करते हैं. अपने जीवन में आपने जो कुछ भी पाया है और जिन व्यक्तियों का साथ आपको मिला है उसे उपहार मानकर उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करें. जीवन के प्रति इस प्रकार का दृष्टिकोण रखकर आप अपने जीवन में सुख और शांति के आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. यह आत्मिक समृद्धि का सूत्र है.
20 – ज़ेन जैसे परिवेश का निर्माण - ऊपर बताये गए अनुसार अपनी टेबल और दराज़ को व्यवस्थित करने का प्रयास करें. ऐसा करने के बाद उस व्यवस्था को और दूसरे स्थानों की ओर फैलने का अवसर प्रदान करें जब तक आपके इर्दगिर्द सरल, शांत, ज़ेन जैसे परिवेश का निर्माण न हो जाए. ऐसे परिवेश में जीने और काम करने से जीवन में अतुलनीय शांति और रचनात्मकता आती है और तनाव और दबाव कोसों दूर हो जाते हैं.





Health
स्वास्थ्यवर्धक सौंफ ---------
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मस्तिष्क संबंधी रोगों में सौंफ अत्यंत गुणकारी है। यह मस्तिष्क की कमजोरी के अतिरिक्त दृष्टि-दुर्बलता, चक्कर आना एवं पाचनशक्ति बढ़ाने में भी लाभकारी है। इसके निरंतर सेवन से दृष्टि कमजोर नहीं होती तथा मोतियाबिंद से रक्षा होती है।
* उलटी, प्यास, जी मिचलाना, पित्त-विकार, जलन, पेटदर्द, अग्निमांद्य, पेचिश, मरोड़ आदि व्याधियों में यह लाभप्रद है।
* सौंफ, धनिया व मिश्री का समभाग चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद लेने से हाथ-पाँव तथा पेशाब की जलन, अम्लपित्त (एसिडिटी) व सिरदर्द में आराम मिलता है।
* सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर रखें। दो चम्मच मिश्रण दोनों समय भोजन के बाद एक से दो माह तक खाने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा जठराग्नि तीव्र होती है।
* बच्चों के पेट के रोगों में दो चम्मच सौंफ का चूर्ण दो कप पानी में अच्छी तरह उबाल लें। एक चौथाई पानी शेष रहने पर छानकर ठण्डा कर लें। इसे एक-एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन-चार बार पिलाने से पेट का अफरा, अपच, उलटी (दूध फेंकना), मरोड़ आदि शिकायतें दूर होती हैं।
* आधी कच्ची सौंफ का चूर्ण और आधी भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग कराएं इससे गैस और अपच दूर हो जाती है।
* भूनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है।
* बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर भागों में लेकर पीसकर भर दें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद 1 टी स्पून लें। इससे स्मरणशक्ति बढ़ती है।
* 5-6 ग्राम सौंफ लेने से लीवर ठीक रहता है और आंखों की ज्योति बढ़ती है।
* तवे पर भुनी हुई सौंफ के मिक्स्चर से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है। दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।
* सौंफ की ठंडाई बनाकर पीएं। इससे गर्मी शांत होगी। हाथ-पाव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर, मिश्री मिलाकर खाना खाने के बाद 5 से 6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।
* अगर गले में खराश हो गई है तो सौंफ चबाना फायदेमंद होता है।
* सौंफ चबाने से बैठा हुआ गला भी साफ हो जाता है। रोजाना सुबह-शाम खाली सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे त्वचा चमकती है। वैसे तो सौंफ का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इससे कई प्रकार के छोटे-मोटे रोगों से निजात मिलती है।






अमीर आदमी था.
उसने समुद्र मेँ अकेले घुमने के
लिए एक नाव बनवाई.,
छुट्टी के दिन वह नाव
लेकर समुद्र की सैर करने
निकला.
आधे समुद्र तक
पहुचा ही था कि अचानक
एक जोरदार तुफान आया.
उसकी नाव पुरी तरह से
तहस-नहस हो गई लेकिन
वह लाईफ जैकेट की मदद से
समुद्र मेँ कूद गया.
जब तूफान शांत हुआ तब वह
तैरता तैरता एक टापू पर
पहुँचा लेकिन वहाँ भी कोई
नहीँ था.
टापू के चारोँ ओर समुद्र के
अलावा कुछ भी नजर
नहीँ आ रहा था.
उस आदमी ने सोचा कि अब
पूरी जिदंगी मेँ
किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे
साथ ऐसा क्यूँ हुआ..?
उस
आदमी को लगा कि भगवान
ने मौत से बचाया तो आगे
का रास्ता भी भगवान
ही बताएगा.
धीरे धीरे वह वहाँ पर उगे
झाड-पत्ते खाकर दिन
बिताने लगा.
अब धीरे-धीरे
उसकी श्रध्दा टूटने
लगी भगवान पर से
उसका विश्वास उठ गया.
उसको लगा कि इस
दुनिया मेँ भगवान है
हि नहीँ.!
फिर उसने सोचा कि अब
पूरी जिंदगी यहीँ इस
टापू पर बितानी है
तो क्यूँ ना एक
झोपडी बना लूँ..?
फिर उसने झाड
कि डालियो और पत्तो से
एक
छोटी सी झोपडी बनाई.
उसको लगा कि आज
से झोपडी मेँ सोने
को मिलेगा आज से बाहर
नहीँ सोना पडेगा.
रात हुई
ही थी कि अचानक मौसम
बदला बिजलियाँ जोर
जोर से गिडगिराने लगीँ.!
तभी अचानक एक
बिजली उस झोपडी पर आ
गिरी और झोपडी धधकते
हुए जलने लगी.
यह देखकर वह आदमी टूट
गया आसमान की तरफ
देखकर बोला
तू भगवान नहीँ , राक्षस
है,
तुझमे दया जैसा कुछ है
ही नहीँ तू बहुत क्रुर है.
हताश होकर सर पर हाँथ
रखकर रो रहा था.
कि अचानक एक नाव टापू
के पास आई.
नाव से उतरकर
दो आदमी बाहर आये.
और बोले कि, हम तुम्हेँ
बचाने आये हैँ,
तुम्हारा जलता हुआ
झोपडा देखा तो लगा कि कोई
उस टापू पर मुसीबत मेँ है.!
अगर तुम
अपनी झोपडी नही जलाते
तो हमेँ
पता नही चलता कि टापू
पर कोई है!
उस आदमी कि आँखो से आँसु
गिरने लगे.
उसने ईश्वर से
माफी माँगी और
बोला कि मुझे
क्या पता कि आपने मुझे
बचाने के लिए
मेरी झोपडी जलाई थी !
सरलता और सहजता ही जीवन में सफलता का मंत्र हैं। ये दोनों तत्व मनुष्य को सौभाग्यशाली बनाते हैं क्योंकि सहज रहने से तनाव उत्पन्न नहीं होता और सरल रहने से अनावश्यक कामना। अनावश्यक कामना और तनाव ही दुर्भाग्य का कारण बनते हैं और सरलता और सहजता इन दोनों की तत्वों का पतन करते हैं। सरलता है न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ जीवन यापन। जीवन के कठिन मार्ग में ईश्वर का आशीर्वाद ही जीवन को सरल बनता है। सरलता का दूसरा नाम है सहजता। सहजता की प्राप्ति कठिन और जटिल परिस्थितियों से पार पाने का मार्ग प्रशस्त करती है।



उपलब्धियाँ अक्सर एकांगी होती है और इनसे प्राप्त अहंकार जीवन को एकरंगी बना देता है। जीवन तो भिन्न- भिन्न अनुभव लेने से समृद्ध होता है।
एक क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करके चादर तान के सो गये और मन में सोच लिया कि संसार फतेह कर लिया तो बहुत बड़ी भूल-भूलैया में फँस गये।
दौलत तुमने बहुत कमा ली या माता-पिता से मिल गयी और इसी कारण फूले-फूले रहने लगे तो तब तो तुम बहुत बड़े गरीब रह गये जीवन में। धन की अधिकता में तुमसे जीवन भर यह अहसास तो अनछुआ ही रह जायेगा कि अभाव क्या है?
बहुत बड़े पद पर पहुँच गये हो तो इस बात का अहंकार मत करना कि बस अब सारा जीवन तुम्हारी मुट्ठी में आ गया है, तुम अपने विभाग के सबसे छोटे पद पर काम करने वाले कर्मचारी के जीवन से एकदम अपरिचित हो। वह क्या सोचता है? उसकी क्या सीमायें हैं?
पाने का ही नाम जीवन नहीं है बल्कि अभाव भी एक जीवंत अनुभव है।
तुम बहुत बड़े कवि बन गये हो, पर जरा सोचो तो कि कितने अच्छे अच्छे गद्य लेखक दुनिया में तुम्हारे साथ ही विचरण कर रहे हैं और तुमने अभी तक श्रेष्ठ किस्म का गद्य रचने का आनंद नहीं लिया।
तुम तो सिर्फ अपने जैसा जीवन जानते हो। दिन के बहुत सारे घंटे व्यवसाय में ऊँचाई पाकर किसी बड़े पद पर आसीन होने की मह्त्वाकांक्षा का पीछा करने में खर्च हो जाते हैं तो ऐसी जीवनशैली से उत्पन्न व्यस्तता और अहंकार से तुम बहुत सारे अन्य तरह के भावों से अनभिज्ञ ही रह जाओगे।
अपने से अलग लोगों को, भले ही वे तुम्हारे सामने आर्थिक रुप से गरीब हों, उपलब्धियों में कमतर लगते हों, निम्न भाव से न देखना, किसी न किसी मामले में वे तुमसे ज्यादा उपलब्धि रखते होंगे।
केवल सफलतायें तुम्हे बहुत गहरे नहीं ले जा सकतीं। तुम्हे इसे भी जानना है कि असल में असफलता क्या है?
जब तक एक ही भाव के दोनों पूरक हिस्सों को नहीं जान लोगे तब तक दोनों ही से परे होने का अहसास नहीं जान पाओगे।
न पाने में अटकना है और न ही अभाव में। किसी भी एक भाव में अटक गये तो जीवन बेकार ही जाने के पूरे पूरे आसार बन जाते हैं। जीवन तो इन सब भावों से परे जाने के लिये है और इसके लिये एक भाव के दोनों परस्पर विपरित रुपों को जानना, पहचानना और जीना आवश्यक है।
किसी भी क्षेत्र में उपलब्धि पाना बहुत बड़ी योग्यता है और इसके लिये जीतोड़ प्रयास करो पर उपलब्धियों का अहंकार भूल कर भी न करो।
वास्तव में उपलब्धि जनित अहंकार का अकेला तत्व ही मनुष्य के जीवन को गरीब बना कर छोड़ देता है। इस अहंकार की उपस्थिति में आध्यात्मिक विकास असंभव है।
ये सब साधारण उपलब्धियाँ, जो तुम्हे बहुत बड़ी लगती हैं, और ये सारे अभाव जो तुम्हे बहुत बड़े लगते हैं, ये सारी बातें माध्यम हैं तुम्हे एक बड़े लक्ष्य की यात्रा से दूर रखने के। इन्ही सब बातों में अटक गये तो इन्ही के होकर रह गये।
जब जीवन में साधारण उपलब्धियों और अभावों से गुजर जाओगे तब तुम्हे आभास होगा उस अभाव का जिसे भरने के लिये की गयी यात्रा ही मनुष्य जीवन में सार्थकता ला पाती है।
बस साक्षी बने रहो, एक दिन वह प्यास जगेगी जरुर, एक दिन तुम उस परम यात्रा पर निकलोगे जरुर।
Story
एक बार एक त्यागी संत भिक्षा मांगते हुए एक सेठ के घर पहुचे , संत की सारगर्भित बाते सुनकर सेठ बड़ा प्रभावित
हुआ , तथा मन में कुछ पाने की लालसा रखकर उसने संत को प्रणाम किया , परन्तु संत उसके मन की बात समझ गए ,
अतः उन्होंने भी पलटकर सेठ को प्रणाम किया , तब सेठ ने आश्चर्य से पूछा - आपने मुझे क्यों प्रणाम किया ?
तब संत ने भी यही प्रश्न दोहराया , तो सेठ ने कहा की आप तो बड़े त्यागी है , आपने तो स्त्री , पुत्र , धन , जमीन-जायदाद
आदि सभी का त्याग कर दिया है , तब संत ने बड़े शांत चिर्त हो कर कहा- अच्छा तुम ही मुझे एक बात बताओ-
" भगवान् बड़ा है या रुपया-पैसा " ? तब सेठ ने कहा - माहात्मन नि-संदेह इन सबसे बड़े तो भगवान् ही है, तब संत ने कहा की इसीलिए तो
तुम बड़े त्यागी हुए , जो बड़ा त्याग करे वह बड़ा त्यागी , जो छोटा त्याग करे वह छोटा त्यागी , एव तुम तो बड़े त्यागी हो, क्योकि जिसने संसार के सुखो के लिए भगवान् तक का त्याग कर रखा है ,
यह सुनकर सेठ संत के चरणों में गिर पड़ा .............


एक गरीब माँ के छोटे बच्चे ने जब दुकान पर
आईसक्रीम देखी तो उसने अपनी माँ से कहा कि
मुझे ये दिलाओ ना
मगर
उसगरीब माँ के पास पैसे नी थे
तो वह खडी खडी रोने लगी और अपनी दर्द
भरी आवाज मे दुनिया को कुछ ये कहने लगी
मेरी गरीबी को देख जमाना मुस्कुराता है
तेरी शोहरत के आगे ये सर झुकाता है
तेरी गलती को भी ये सही करार देते है
मेरे सही होने पर भी ये मुझे मार देते है
तेरे सुख मे है सुखी और मेरे दुःख से अनजान है
क्यो है इतना फर्क जब हम दोनो एक समान है
मै भी तो इंसान हु और तु भी तो इंसान है
मै एक जोडी कपडे मे ही मर जाया करती हु
पेट भर खाना तो कभी कभी खाया करती हु
तुने कपडो का भडार लगा दिया
खाना तुने तो क्या तेरे कुतो ने भी खा लिया
कुते को करते हो प्यार और मेरा करते अपमान है
क्यो है इतना फर्क जब हम दोनो एक समान है
मै भी तो इंसान हु ओर तु भी तो इंसान है
सच मै अमीरी और गरीबी रुपी दिवार जब हमारे देश मे
से ढह जाएगे
उस दिन कोई भी माँ आसु नही बहाएगी.

Wednesday, 30 October 2013

एक बार मुझे मेरे गाँव का सरपंच बना दिया गया..
गाँव वालो ने सोचा की छोरा पड़ा लिखा है...समझदार है, अगर ये सरपंच बन गया तो गाँव की भलाई के लिए काम करेगा..

मौसम बदला, सर्दियों के आने के महीने भर पहले गाँव वालो ने मुझसे पूछा की - सरपंच साहब इस बार सर्दी कितनी तेज पड़ेगी..
मैंने गाँव वालों से कहा की मैं आपको कल बताऊंगा..

मैं तुरंत ही शहर की और निकल गया..वहा जाकर मौसम विभाग में पता किया तो मौसम विभाग वाले बोले - की सरपंच साहब इस बार बहुत तेज सर्दी पड़ने वाली है..

मैंने भी दुसरे दिन गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया...
गाँव वालो को विश्वास था की अपने सरपंच साहब पढ़े लिखे हैं..शहर से पता करके आये हैं तो सही कह रहे होंगे..गाँव वालो की नजर में मेरी इज्जत और बढ़ गयी..

तेज सर्दिया पड़ने की बात सुनकर गाँव वालो ने सर्दी से बचने के लिए लकडिया इक्कठी करनी शुरू कर दी.
महीने भर बाद जब सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा तो गाँव वालो ने मुझसे फिर पूछा..मैंने उन्हें फिर दुसरे दिन के लिए टाला..और शहर के मौसम विभाग में पहुँच गया..

मौसम विभाग वाले बोले की सरपंच साहब आप चिंता मत करो इस बार सर्दियों के सरे रिकॉर्ड टूट जायेंगे..

मैंने ऐसा ही गाँव में आकर बोल दिया..मेरी बात सुनकर गाँव वाले पागलो की तरह लकडिया इक्कठी करने लग गए..

इस तरह पंद्रह दिन और बीत गए लेकिन सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा..गाँव वाले फिर मेरे पास आये..मैं फिर मौसम विभाग जा पहुंचा..
मौसम विभाग वालो ने फिर वही जवाब दिया की सरपंच साहब आप देखते जाइये की सर्दी क्या जुलम ढाती है ?

मैंने फिर से गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया..अब तो गाँव वाले सारे काम धंधे छोड़कर सिर्फ लकडिया इक्कठी करने के काम में लग गए..
इस तरह पंद्रह दिन और बीत गए..

लेकिन सर्दिया शुरू नहीं हुई..

गाँव वाले मुझे कोसने लगे..मैंने उनसे एक दिन का वक्तऔर माँगा..
में तुरंत मौसम विभाग पहुंचा तो उन्होंने फिर ये जवाब दिया की सरपंच साहब इस बार सर्दियों के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं..

अब मेरा भी धैर्य जवाब दे गया..

मैंने पूछा - आप इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं.

मौसम विभाग वाले बोले - की सरपंच साहब हम पिछले दो महीने से देख रहे हैं...पड़ोस के गाँव वाले पागलो की तरह लकडिया इक्कठी कर रहे हैं..इसका मतलब सर्दी बहुत तेज पड़ने वाली है.....

Tuesday, 17 September 2013

Health
A woman (65) was diabetic for the last 20+ years
and was taking insulin twice a day.
She used the enclosed homemade medicine for a fortnight and
now she is absolutely free of diabetes and taking all her food as normal
including sweets.
The doctors have advised her to stop insulin and any other blood sugar controlling drugs.
I request you all please circulate the email below to as many people as you
can and let them take maximum benefit from it.
( A Bombay Kidney Speciality expert )
made the extensive experiments with perseverance and patience and discovered a
successful treatment for diabetes.
Now a days a lot of people, old men &
women in particular suffer a lot due to Diabetes.
Ingredients:
1 - Wheat 100 gm
2 - Gum (of tree) (gondh) 100 gm
3 - Barley 100 gm
4 - Black Seeds (kalunji) 100 gm
Method of Preparation :
Put all the above ingredients in 5 cups of water.
Boil it for 10 minutes and put off the fire.
Allow it to cool down by itself.
When it has become cold, filter out the
seeds and preserve water in a glass jug or bottle.
How to use it?
Take one small cup of this water every day early morning when your stomach is empty.
Continue this for 7 days.Next week repeat the same but on alternate days. With these 2 weeks of
treatment you will wonder to see that you have become normal and can eat
normal food without problem.

Monday, 16 September 2013

"अंधविश्वास नहीं, आत्मविश्वास रखो,
आंखे बंद नहीं बल्कि खुली रखो।
सोच को छोटा नहीं, बड़ा करो,
अपने को बांधो नहीं बल्कि अपने को मुक्त
करो।
खुद को नयी दिशा में लेकर जाओ,...
अब तो अपने को पानी डालकर जगाओ।
सोते-२ जिन्दगी को मत गुजारो,
जाने से पहले अपने और
अपनों को नया जीवन तो दे जाओ।
इतना भी न कर सको तो जन्म लेने
का भी क्या फायदा?
पुरानी सोच को न बदल पाओ तो जीने
का भी क्या फायदा?" —



कृपया ध्यान दें---
1. किसी को अपनी राय देना, और अपनी राय को किसी के ऊपर थोपना, इन दोनों चीजों में बहुत अंतर होता है |
2. वास्तविक जीवन में सामाजिक कार्य करने के लिए अपना पसीना बहाना पड़ता है | जो लोग फ़ेसबूक पर लिखते हैं, उनको देखकर कोई यह राय ना बनाए, कि उस इंसान का जीवन सिर्फ फ़ेसबूक पर अटकी हुई है | आजकल ज़्यादा काम इंटरनेट पर होता है, इसलिए वे लोग फ़ेसबूक पर समय देते हैं |
3. फ़ेसबूक पर ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो सिर्फ सामाजिक मुद्दे पर लिखते ही नहीं वास्तविक जीवन में भी उस मुद्दे पर काम नहीं करते हैं, और फ़ेसबूक पर ऐसे लोगों की भी भरमार है, जो बिना सोचे समझे सिर्फ अपनी राय फेंकने के लिए आते हैं |
4. कोई आदमी हो या औरत अगर वो सामाजिक कार्य कर रहे हैं, तो उसे कृपया साधू, संत और साध्वी का ख़िताब ना दें | क्योंकि, सभी का व्यक्तिगत जीवन होता है | अगर कोई अपने दिन का 12 घंटा समाज को दे रहा है, तो उसको बाकी 12 घंटे अपने हिसाब से जीवन को जीने का हक है | कृपया अपने सोच को थोड़ा वास्तविक बनाइये |
5. किसी के बारे में बिना जाने, बिना सोचे समझे, कोई भी राय ना बनाएँ, और ना ही दूसरों के साथ किसी को भी जोड़ें | दूसरों के साथ किसी की भी तुलना या आलोचना भी नहीं करनी चाहिए, अगर करते हैं, तो इससे यह साबित होता है, कि आपके पास कोई काम नहीं है | आप अपने जीवन में व्यस्त नहीं हैं, आप बेकार हैं, और मानसिक तौर पर बीमार हैं, और अपनी निराशा को दूर करने के लिए दूसरे के पीछे पड़े रहते हैं | उनका काम बिगाड़ने के लिए | 
जब कोई खुद सामाजिक कार्य करते है, तब उस कार्य का मुल्य समझ में आता है, कि एक कार्य के पीछे कितनी मेहनत करनी पड़ती है, और हमारे समाज में तो और भी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है | क्योंकि, यह सोये हुए लोगो का जो देश है | सबको जगाना बहुत मुश्किल कार्य है | अगर हम किसी को उसके कार्य में उत्साह नहीं दे सकते, तो उसकी आलोचना करने का भी कोई हक़ नहीं रखता | --





एक आदमी की गाड़ी का एक्सिडेँट
एक महिला की कार से
टकरा कर हो जाता है,
पर एक्सिडेंट के बाद
दोनों सुरक्षित बच जाते
है !
जब दोनों गाड़ी से बाहर
आते है तो महिला पहले
अपनी गाड़ी को देखती है
जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त
होती है, फिर सामने
कि तरफ जाती है
जहाँ आदमी भी अपनी गाड़ी
से देख रहा होता है !
तभी वह महिला उससे
रूबरू होते हुए कहती है,
"देखिये कैसा संयोग है
कि गाड़ियाँ पूरी तरह से
टूट-फूट गयी, पर हमें चोट
तक नहीं आयी !
ये सब भगवान कि मर्जी से
हुआ है ताकि हम
दोनों मिल जाए !
मुझे लगता है कि अब हमें
आपस में दोस्ती कर
लेनी चाहिए !"
आदमी ने
भी सोचा कि इतना नुक्सान
होने के बाद
भी गुस्सा करने के बजाय
दोस्ती के लिए कह
रही है, तो कर लेता हूँ और
कहता है कि "आप बिल्कुल
ठीक कह रही है कि ये सब
भगवान की मर्जी से हुआ
है !"
तभी महिला ने कहा, "एक
चमत्कार और देखिये
कि पूरी गाड़ी टूट-फूट
गयी पर अन्दर
रखी शराब की बोतल
बिल्कुल सही है !"
आदमी ने कहा, "वाकई ये
तो हैरान करने
वाली बात है !"
महिला ने बोतल
खोली और कहा, "आज
हमारी जान बची है,
हमारी दोस्ती हुई है
तो क्यों ना
थोड़ी सी ख़ुशी मनाई
जाए !"
महिला ने बोतल को उस
आदमी की तरफ बढ़ाया,
उसने भी बोतल
को पकड़ा और मुहं से
लगाया और आधी करके
बोतल वापिस
महिला को दे दी !
फिर कहने लगा, "आप
भी लीजिये !"
महिला ने बोतल
को पकड़ा, उसका ढक्कन
बंद किया और एक तरफ रख
दी !
आदमी ने पूछा, "क्या आप
शराब नहीं पियेंगी ?"
महिला : "नहीं... मुझे
लगता है, मुझे पुलिस
का इन्तजार
करना चाहिए !!" 




गला और छाती की बीमारी का इलाज :
>गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दावा है हल्दी । 
>जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह खोल कर गले में डाल देना , और फिर थोड़ी देर चुप होके बैठ जाना तो ये हल्दी गले में नीचे उतर जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । 
>ये छोटे बच्चो को तो जरुर करना ; बच्चो के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है तो हम ऑपरेशन करवाके उनको कटवाते है ; वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है ।
>गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो गले में डालने से तुरंत ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो । 
>दूसरी दावा है अदरक , ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रखलो और टाफी की तरह चुसो खासी तुरंत बंद हो जाएगी । 
>अगर किसीको खासते खासते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या शहद । अब इसको थोडा गरम करके पी लेना तो जिसको खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खासी एक मिनट में बंद हो जाएगी । 
>और एक अच्छी दवा है, अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । 
>काली मिर्च है गोल मिर्च इसको मुह में रख के चबालो , पीछे से गरम पानी पी लो तो खासी बंद हो जाएगी, काली मिर्च को चुसो तो भी खासी बंद हो जाती है ।
>छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छा दवा है गाय मूत्र ; आधा कप गोमूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है । 
>गोमूत्र पिने से टीबी भी ठीक हो जाता है , लगातार पांच छे महीने पीना पड़ता है । 
>दमा अस्थमा का और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या शहद मिला के गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है ।
अदरक : ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रखलो और टाफी की तरह चुसो खासी तुरंत बंद हो जाएगी ।


एक धनवान व्यक्ति था, बडा विलासी था। हर समय उसके मन में
भोग विलास सुरा-सुंदरी के विचार ही छाए रहते थे। वह खुद
भी इन विचारों से त्रस्त था, पर आदत से लाचार, वे विचार उसे
छोड ही नहिं रहे थे।
एक दिन आचानक किसी संत से उसका सम्पर्क हुआ। वह संत से उक्त
अशुभ विचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगा। संत
ने कहा अच्छा, अपना हाथ दिखाओं, हाथ देखकर संत
भी चिंता में पड गये। संत बोले बुरे विचारों से मैं तुम्हारा पिंड
तो छुडा देता, पर तुम्हारे पास समय बहुत ही कम है। आज से ठीक
एक माह बाद तुम्हारी मृत्यु निश्चित है, इतने कम समय में तुम्हे
कुत्सित विचारों से निजात कैसे दिला सकता हूं। और फ़िर
तुम्हें भी तो तुम्हारी तैयारियां करनी होगी।
वह व्यक्ति चिंता में डूब गया। अब क्या होगा, चलो समय रहते
यह मालूम तो हुआ कि मेरे पास समय कम है। वह घर और व्यवसाय
को व्यवस्थित व नियोजीत करने में लग गया। परलोक के लिये
पुण्य अर्जन की योजनाएं बनाने लगा, कि कदाचित परलोक
हो तो पुण्य काम लगेगा। वह सभी से अच्छा व्यवहार करने लगा।
जब एक दिन शेष रहा तो उसने विचार किया, चलो एक बार संत
के दर्शन कर लें। संत ने देखते ही कहा ‘बडे शान्त नजर आ रहे हो,
जबकि मात्र एक दिन शेष है’। अच्छा बताओ क्या इस अवधि में
कोई सुरा-सुंदरी की योजना बनी क्या ? व्यक्ति का उत्तर
था, महाराज जब मृत्यु समक्ष हो तो विलास कैसा? संत हंस
दिये। और कहा वत्स अशुभ चिंतन से दूर रहने का मात्र एक
ही उपाय है “मृत्यु निश्चित है यह चिंतन सदैव सम्मुख
रखना चाहिए,और उसी ध्येय से प्रत्येक क्षण का सदुपयोग
करना चाहिए”।


Story
महावीर स्वामी पेड़ के नीचे ध्यानमग्न बैठे थे। पेड़ पर आम लटक रहे
थे।
बच्चों ने आम तोड़ने के लिए पत्थर फेंके। कुछ पत्थर आम को लगे और
एक महावीर स्वामी को लगा।
बच्चों ने कहा - प्रभु! हमें क्षमा करें, हमारे कारण आपको कष्ट हुआ
है।
प्रभु बोले - नहीं, मुझे कोई कष्ट नहीं हुआ।
बच्चों ने पूछा - तो फिर आपकी आंखों में आंसू क्यों?
महावीर ने कहा - पेड़ को तुमने पत्थर मारा तो इसने तुम्हें मीठे
फल दिए, पर मुझे पत्थर मारा तो मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सका, इसलिए
मैं दुखी हूं।


Story
एक शराब फेक्टरी में शराब टेस्ट करने वाला छुट्टी पर
चला गया और फेक्टरी के मालिक को एक नए आदमी की तलाश
थी जो शराब टेस्ट करने का काम बखूबी कर सके..
एक दिन उसका एक कर्मचारी किसी पियक्कड को पकड़
लाया और बोला " सर इसके टेस्टिंग स्किल की सभी बहुत
तारीफ़ करते हैं....इसे रख लीजिए..
शराब फेक्टरी के मालिक ने देखा कि वो आदमी बहुत ही गंदा और
बदबूदार था और वो उसे रखना नहीं चाहता था...
.
फिर भी उसने एक वाइन उसे चखने के लिए दी.. चखते
ही पियक्कड बोला " ये रेड वाइन है..., नोर्थ अमेरिका में बनी है,
तीन साल पुरानी है, और इसे लकड़ी के बॉक्स में मेच्योर
किया गया है..."
फेक्टरी के मालिक की आंखें खुली की खुली रह
गयी. ...क्योंकि पियक्कड ने एक दम सही पहचान की थी उस
शराब की....
उसको उसने एक एक करके बीस तरह की शराब उसे
पिलाई. ...और उसने एक दम सही जवाब दिया.... पर फेक्टरी के
मालिक को उसके शरीर से आ रही बदबू बहुत परेशान कर
रही थी और उसने अपनी सेक्रेटरी को बुलाया और कहा " मैं इसे
फेल करके नौकरी नहीं देना चाहता, कोई उपाय बताओ"
सेक्रेटरी ने कहा " सर मैं अपना urine ( पेशाब ) एक गिलास में लेकर
आती हूँ और इसे पीने के लिए देती हूँ....और आपको इसे न रखने
का बहाना मिल जाएगा..."
पियक्कड उसे पीते ही बोला "उम्र छब्बीस साल, प्रेग्नेंट है, तीन
महीने हो चुके हैं. ...और अगर नौकरी नहीं दी तो ये
भी बता दूंगा कि बच्चे का बाप कौन है...??
यह सुनते ही फैक्ट्री के मालिक और उसकी सेकेरेट्री बेहोस
हो गए.