Monday, 16 September 2013

"अंधविश्वास नहीं, आत्मविश्वास रखो,
आंखे बंद नहीं बल्कि खुली रखो।
सोच को छोटा नहीं, बड़ा करो,
अपने को बांधो नहीं बल्कि अपने को मुक्त
करो।
खुद को नयी दिशा में लेकर जाओ,...
अब तो अपने को पानी डालकर जगाओ।
सोते-२ जिन्दगी को मत गुजारो,
जाने से पहले अपने और
अपनों को नया जीवन तो दे जाओ।
इतना भी न कर सको तो जन्म लेने
का भी क्या फायदा?
पुरानी सोच को न बदल पाओ तो जीने
का भी क्या फायदा?" —



कृपया ध्यान दें---
1. किसी को अपनी राय देना, और अपनी राय को किसी के ऊपर थोपना, इन दोनों चीजों में बहुत अंतर होता है |
2. वास्तविक जीवन में सामाजिक कार्य करने के लिए अपना पसीना बहाना पड़ता है | जो लोग फ़ेसबूक पर लिखते हैं, उनको देखकर कोई यह राय ना बनाए, कि उस इंसान का जीवन सिर्फ फ़ेसबूक पर अटकी हुई है | आजकल ज़्यादा काम इंटरनेट पर होता है, इसलिए वे लोग फ़ेसबूक पर समय देते हैं |
3. फ़ेसबूक पर ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो सिर्फ सामाजिक मुद्दे पर लिखते ही नहीं वास्तविक जीवन में भी उस मुद्दे पर काम नहीं करते हैं, और फ़ेसबूक पर ऐसे लोगों की भी भरमार है, जो बिना सोचे समझे सिर्फ अपनी राय फेंकने के लिए आते हैं |
4. कोई आदमी हो या औरत अगर वो सामाजिक कार्य कर रहे हैं, तो उसे कृपया साधू, संत और साध्वी का ख़िताब ना दें | क्योंकि, सभी का व्यक्तिगत जीवन होता है | अगर कोई अपने दिन का 12 घंटा समाज को दे रहा है, तो उसको बाकी 12 घंटे अपने हिसाब से जीवन को जीने का हक है | कृपया अपने सोच को थोड़ा वास्तविक बनाइये |
5. किसी के बारे में बिना जाने, बिना सोचे समझे, कोई भी राय ना बनाएँ, और ना ही दूसरों के साथ किसी को भी जोड़ें | दूसरों के साथ किसी की भी तुलना या आलोचना भी नहीं करनी चाहिए, अगर करते हैं, तो इससे यह साबित होता है, कि आपके पास कोई काम नहीं है | आप अपने जीवन में व्यस्त नहीं हैं, आप बेकार हैं, और मानसिक तौर पर बीमार हैं, और अपनी निराशा को दूर करने के लिए दूसरे के पीछे पड़े रहते हैं | उनका काम बिगाड़ने के लिए | 
जब कोई खुद सामाजिक कार्य करते है, तब उस कार्य का मुल्य समझ में आता है, कि एक कार्य के पीछे कितनी मेहनत करनी पड़ती है, और हमारे समाज में तो और भी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है | क्योंकि, यह सोये हुए लोगो का जो देश है | सबको जगाना बहुत मुश्किल कार्य है | अगर हम किसी को उसके कार्य में उत्साह नहीं दे सकते, तो उसकी आलोचना करने का भी कोई हक़ नहीं रखता | --





एक आदमी की गाड़ी का एक्सिडेँट
एक महिला की कार से
टकरा कर हो जाता है,
पर एक्सिडेंट के बाद
दोनों सुरक्षित बच जाते
है !
जब दोनों गाड़ी से बाहर
आते है तो महिला पहले
अपनी गाड़ी को देखती है
जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त
होती है, फिर सामने
कि तरफ जाती है
जहाँ आदमी भी अपनी गाड़ी
से देख रहा होता है !
तभी वह महिला उससे
रूबरू होते हुए कहती है,
"देखिये कैसा संयोग है
कि गाड़ियाँ पूरी तरह से
टूट-फूट गयी, पर हमें चोट
तक नहीं आयी !
ये सब भगवान कि मर्जी से
हुआ है ताकि हम
दोनों मिल जाए !
मुझे लगता है कि अब हमें
आपस में दोस्ती कर
लेनी चाहिए !"
आदमी ने
भी सोचा कि इतना नुक्सान
होने के बाद
भी गुस्सा करने के बजाय
दोस्ती के लिए कह
रही है, तो कर लेता हूँ और
कहता है कि "आप बिल्कुल
ठीक कह रही है कि ये सब
भगवान की मर्जी से हुआ
है !"
तभी महिला ने कहा, "एक
चमत्कार और देखिये
कि पूरी गाड़ी टूट-फूट
गयी पर अन्दर
रखी शराब की बोतल
बिल्कुल सही है !"
आदमी ने कहा, "वाकई ये
तो हैरान करने
वाली बात है !"
महिला ने बोतल
खोली और कहा, "आज
हमारी जान बची है,
हमारी दोस्ती हुई है
तो क्यों ना
थोड़ी सी ख़ुशी मनाई
जाए !"
महिला ने बोतल को उस
आदमी की तरफ बढ़ाया,
उसने भी बोतल
को पकड़ा और मुहं से
लगाया और आधी करके
बोतल वापिस
महिला को दे दी !
फिर कहने लगा, "आप
भी लीजिये !"
महिला ने बोतल
को पकड़ा, उसका ढक्कन
बंद किया और एक तरफ रख
दी !
आदमी ने पूछा, "क्या आप
शराब नहीं पियेंगी ?"
महिला : "नहीं... मुझे
लगता है, मुझे पुलिस
का इन्तजार
करना चाहिए !!" 




गला और छाती की बीमारी का इलाज :
>गले में किनती भी ख़राब से ख़राब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दावा है हल्दी । 
>जैसे गले में दर्द है, खरास है , गले में खासी है, गले में कफ जमा है, गले में टोनसीलाईटिस हो गया ; ये सब बिमारिओं में आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना और मुह खोल कर गले में डाल देना , और फिर थोड़ी देर चुप होके बैठ जाना तो ये हल्दी गले में नीचे उतर जाएगी लार के साथ ; और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरुरत नही । 
>ये छोटे बच्चो को तो जरुर करना ; बच्चो के टोन्सिल जब बहुत तकलीफ देते है तो हम ऑपरेशन करवाके उनको कटवाते है ; वो करने की जरुरत नही है हल्दी से सब ठीक होता है ।
>गले और छाती से जुडी हुई कुछ बीमारिया है जैसे खासी ; इसका एक इलाज तो कच्ची हल्दी का रस है जो गले में डालने से तुरंत ठीक हो जाती है चाहे कितनी भी जोर की खासी हो । 
>दूसरी दावा है अदरक , ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रखलो और टाफी की तरह चुसो खासी तुरंत बंद हो जाएगी । 
>अगर किसीको खासते खासते चेहरा लाल पड़ गया हो तो अदरक का रस ले लो और उसमे थोड़ा पान का रस मिला लो दोनों एक एक चम्मच और उसमे मिलाना थोड़ा सा गुड या शहद । अब इसको थोडा गरम करके पी लेना तो जिसको खासते खासते चेहरा लाल पड़ा है उसकी खासी एक मिनट में बंद हो जाएगी । 
>और एक अच्छी दवा है, अनार का रस गरम करके पियो तो खासी तुरन्त ठीक होती है । 
>काली मिर्च है गोल मिर्च इसको मुह में रख के चबालो , पीछे से गरम पानी पी लो तो खासी बंद हो जाएगी, काली मिर्च को चुसो तो भी खासी बंद हो जाती है ।
>छाती की कुछ बिमारिया जैसे दमा, अस्थमा, ब्रोंकिओल अस्थमा, इन तीनो बीमारी का सबसे अच्छा दवा है गाय मूत्र ; आधा कप गोमूत्र पियो सबेरे का ताजा ताजा तो दमा ठीक होता है, अस्थमा ठीक होता है, ब्रोंकिओल अस्थमा ठीक होता है । 
>गोमूत्र पिने से टीबी भी ठीक हो जाता है , लगातार पांच छे महीने पीना पड़ता है । 
>दमा अस्थमा का और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर रोज सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड या शहद मिला के गरम पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है ।
अदरक : ये जो अदरक है इसका छोटा सा टुकड़ा मुह में रखलो और टाफी की तरह चुसो खासी तुरंत बंद हो जाएगी ।


एक धनवान व्यक्ति था, बडा विलासी था। हर समय उसके मन में
भोग विलास सुरा-सुंदरी के विचार ही छाए रहते थे। वह खुद
भी इन विचारों से त्रस्त था, पर आदत से लाचार, वे विचार उसे
छोड ही नहिं रहे थे।
एक दिन आचानक किसी संत से उसका सम्पर्क हुआ। वह संत से उक्त
अशुभ विचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगा। संत
ने कहा अच्छा, अपना हाथ दिखाओं, हाथ देखकर संत
भी चिंता में पड गये। संत बोले बुरे विचारों से मैं तुम्हारा पिंड
तो छुडा देता, पर तुम्हारे पास समय बहुत ही कम है। आज से ठीक
एक माह बाद तुम्हारी मृत्यु निश्चित है, इतने कम समय में तुम्हे
कुत्सित विचारों से निजात कैसे दिला सकता हूं। और फ़िर
तुम्हें भी तो तुम्हारी तैयारियां करनी होगी।
वह व्यक्ति चिंता में डूब गया। अब क्या होगा, चलो समय रहते
यह मालूम तो हुआ कि मेरे पास समय कम है। वह घर और व्यवसाय
को व्यवस्थित व नियोजीत करने में लग गया। परलोक के लिये
पुण्य अर्जन की योजनाएं बनाने लगा, कि कदाचित परलोक
हो तो पुण्य काम लगेगा। वह सभी से अच्छा व्यवहार करने लगा।
जब एक दिन शेष रहा तो उसने विचार किया, चलो एक बार संत
के दर्शन कर लें। संत ने देखते ही कहा ‘बडे शान्त नजर आ रहे हो,
जबकि मात्र एक दिन शेष है’। अच्छा बताओ क्या इस अवधि में
कोई सुरा-सुंदरी की योजना बनी क्या ? व्यक्ति का उत्तर
था, महाराज जब मृत्यु समक्ष हो तो विलास कैसा? संत हंस
दिये। और कहा वत्स अशुभ चिंतन से दूर रहने का मात्र एक
ही उपाय है “मृत्यु निश्चित है यह चिंतन सदैव सम्मुख
रखना चाहिए,और उसी ध्येय से प्रत्येक क्षण का सदुपयोग
करना चाहिए”।


Story
महावीर स्वामी पेड़ के नीचे ध्यानमग्न बैठे थे। पेड़ पर आम लटक रहे
थे।
बच्चों ने आम तोड़ने के लिए पत्थर फेंके। कुछ पत्थर आम को लगे और
एक महावीर स्वामी को लगा।
बच्चों ने कहा - प्रभु! हमें क्षमा करें, हमारे कारण आपको कष्ट हुआ
है।
प्रभु बोले - नहीं, मुझे कोई कष्ट नहीं हुआ।
बच्चों ने पूछा - तो फिर आपकी आंखों में आंसू क्यों?
महावीर ने कहा - पेड़ को तुमने पत्थर मारा तो इसने तुम्हें मीठे
फल दिए, पर मुझे पत्थर मारा तो मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सका, इसलिए
मैं दुखी हूं।


Story
एक शराब फेक्टरी में शराब टेस्ट करने वाला छुट्टी पर
चला गया और फेक्टरी के मालिक को एक नए आदमी की तलाश
थी जो शराब टेस्ट करने का काम बखूबी कर सके..
एक दिन उसका एक कर्मचारी किसी पियक्कड को पकड़
लाया और बोला " सर इसके टेस्टिंग स्किल की सभी बहुत
तारीफ़ करते हैं....इसे रख लीजिए..
शराब फेक्टरी के मालिक ने देखा कि वो आदमी बहुत ही गंदा और
बदबूदार था और वो उसे रखना नहीं चाहता था...
.
फिर भी उसने एक वाइन उसे चखने के लिए दी.. चखते
ही पियक्कड बोला " ये रेड वाइन है..., नोर्थ अमेरिका में बनी है,
तीन साल पुरानी है, और इसे लकड़ी के बॉक्स में मेच्योर
किया गया है..."
फेक्टरी के मालिक की आंखें खुली की खुली रह
गयी. ...क्योंकि पियक्कड ने एक दम सही पहचान की थी उस
शराब की....
उसको उसने एक एक करके बीस तरह की शराब उसे
पिलाई. ...और उसने एक दम सही जवाब दिया.... पर फेक्टरी के
मालिक को उसके शरीर से आ रही बदबू बहुत परेशान कर
रही थी और उसने अपनी सेक्रेटरी को बुलाया और कहा " मैं इसे
फेल करके नौकरी नहीं देना चाहता, कोई उपाय बताओ"
सेक्रेटरी ने कहा " सर मैं अपना urine ( पेशाब ) एक गिलास में लेकर
आती हूँ और इसे पीने के लिए देती हूँ....और आपको इसे न रखने
का बहाना मिल जाएगा..."
पियक्कड उसे पीते ही बोला "उम्र छब्बीस साल, प्रेग्नेंट है, तीन
महीने हो चुके हैं. ...और अगर नौकरी नहीं दी तो ये
भी बता दूंगा कि बच्चे का बाप कौन है...??
यह सुनते ही फैक्ट्री के मालिक और उसकी सेकेरेट्री बेहोस
हो गए.

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