Thursday, 31 October 2013

कुछ रोचक तथ्य-:

=>सिर्फ एक घंटा हेडफोन लगाने से हमारे
कानो में जीवाणुयों की तादाद 700 गुना बढ़
जाती है.

=>पूरे जीवन काल के दौरान नीद में आप
भिन्न-भिन्न तरह के 70 कीट और 10
मकडीयाँ खा जाते है.

=>आपका दिल एक दिन में लगभग 100,000
बार धडकता है.

=>आप के शरीर की लगभग 25
फीसदी हड़डियाँ आप के पैरों में होती हैं.

=>ऊगलियों के नाखुन पैरों के नाखुनों से 4
गुना ज्यादा जलदी बढ़ते हैं.

=>आप 300 हड़डियों के साथ जन्म लेते है., पर 18 साल तक होतो-होते आप
की हड़डियाँ जुड़ कर 206 रह जाती हैं.

=>एक औसतन ईन्सान दिन में 10 बार
हसता है.





Story


एक आदमी जंगल से गुजर रहा था । उसे चार स्त्रियां मिली।
💠
उसने पहली से पूछा - बहन तुम्हारा नाम क्या हैं ?
उसने कहा "बुद्धि "
तुम कहां रहती हो?
मनुष्य के दिमाग में।
💠
दूसरी स्त्री से पूछा - बहन तुम्हारा नाम क्या हैं ?
" लज्जा "।
तुम कहां रहती हो ?
आंख में ।
💠
तीसरी से पूछा - तुम्हारा क्या नाम हैं ?
"हिम्मत"
कहां रहती हो ?
दिल में ।
💠
चौथी से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
"तंदुरूस्ती"
कहां रहती हो ?
पेट में।
वह आदमी अब थोडा आगे बढा तों फिर उसे चार पुरूष मिले।
💠
उसने पहले पुरूष से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
" क्रोध "
कहां रहतें हो ?
दिमाग में,
दिमाग में तो बुद्धि रहती हैं,
तुम कैसे रहते हो?
जब मैं वहां रहता हुं तो बुद्धि वहां से विदा हो जाती हैं।
💠
दूसरे पुरूष से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
उसने कहां -" लोभ"।
कहां रहते हो?
आंख में।
आंख में तो लज्जा रहती हैं तुम कैसे रहते हो।
जब मैं आता हूं तो लज्जा वहां से प्रस्थान कर जाती हैं ।
💠
तीसरें से पूछा - तुम्हारा नाम क्या हैं ?
जबाब मिला "भय"।
कहां रहते हो?
दिल में तो हिम्मत रहती हैं तुम कैसे रहते हो?
जब मैं आता हूं तो हिम्मत वहां से नौ दो ग्यारह हो जाती हैं।
💠
चौथे से पूछा तुम्हारा नाम क्या हैं?
उसने कहा - "रोग"।
कहां रहतें हो?
पेट में।
पेट में तो तंदरूस्ती रहती हैं,
जब मैं आता हूं तो तंदरूस्ती वहां से रवाना हो जाती हैं।
💠
जीवन की हर विपरीत परिस्थिथि में यदि हम उपरोक्त वर्णित बातो को याद रखे तो कई चीजे टाली जा सकती है.




Health

रोज खाएं एक गाजर --------
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गाजर को पौष्टिक आहार माना जाता है। इसे कच्चा भी खाया जा सकता है और पकाकर भी। यह शरीर को जरूरी एंजाइम, विटामिन और खनिज प्रदान करता है। एक गाजर पूरे दिन की विटामिन ए की आवश्यकता को पूरा करता है। यह ऊर्जा प्रदान करने के साथ हड्डियों, आंखों की दृष्टि और त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। इसका जूस भी काफी लाभकारी होता है। ताजा गाजर का जूस पीने से तनाव और थकान से मुक्ति मिलती है।


गाजर जितना लाल होगा उसमें उतना ज्यादा कैरोटिनायड (विटामिन ए का स्रोत्र) मिलेगा। प्रत्येक 100 ग्राम गाजर में 7.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.6 ग्राम प्रोटीन, 0.3 ग्राम वसा, 30 मिग्रा कैल्शियम, 0.6 मिग्रा आयरन पाया जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन बी1, बी2, बी6, विटामिन सी, के और पोटेशियम भी पाया जाता है।


पूर्व में हुए शोधों के मुताबिक गाजर में प्रचुर मात्रा में फोलिक एसिड पाया जाता है। यह कैंसर से लड़ने में मददगार होता है। साथ ही कोलेस्ट्राल, हार्टअटैक का खतरा काफी कम हो जाता है।


गाजर के फायदे ---

हृदय रोग से बचाव : ईडनबर्ग के वोल्फसन गैस्ट्रोइन्टेस्टेटाइनल लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं के मुताबिक लगातार तीन हफ्तों तक 207 मिली गाजर के जूस के सेवन से11 प्रतिशत कोलेस्ट्राल के स्तर को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक गाजर खाने वालों को हार्टअटैक पड़ने का खतरा न खाने वाले के मुकाबले एक तिहाई कम होता है।


कैंसर से बचाव : इसमें पाया जाने वाला बीटाकैरोटीन कई प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करता है। ब्रिटिश शोधकर्ताओं के मुताबिक बीटा कैरोटीन लेने से फेफड़ों काकैंसर करीब 40 प्रतिशत और आंत का कैंसर होने का खतरा 24 प्रतिशत तक कम हो जाता है। यही नहीं गाजर खाने वाली महिलाओं को उन महिलाओं के मुकाबले स्तन कैंसर होने का खतरा आठ गुना कम हो जाता है जो बिल्कुल गाजर नहीं खाती।


आंखों के लिए फायदेमंद : गाजर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह आंखों के लिए फायदेमंद होता है। इससे आंखों की दृष्टि में सुधार होता है।


स्ट्रोक से बचाव : वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रतिदिन एक गाजर खाने से स्ट्रोक का खतरा 68 प्रतिशत कम हो जाता है।




गुलाब के पौधे से हमें जीवन के गुर सीखने मिलते हैं ,,,,,,,,गुलाव में कांटे अनेक होते है उनकी तुलना में फूल कम ,,,,,,गुलाब का फूल जब काँटों के एकदम नजदीक होता है तब कलि बन सिमटा रहता है स्वयं को समेटे ,,,अपने को सुरक्षित करते ,,,लेकिन धीरे धीरे जब काँटों से दूर होता जाता है तब जाकर पूरा खिल जाता है ,,ऐसे ही जब हम विपरीत परस्तिथि में हों तो स्वयं के विस्तार को समेट लें ,,जीवन में दोनों हैं हमें चुनना है ,,हम काँटों सा जीवन चुने या फूल सा ,,,,फूल अपने अस्तित्व के कारण लोगों द्वारा चुना जाता है ,जबकि कांटे कोई चुनना भी नहीं चाहता ,,,हालाँकि काँटों के बीच ही गुलाब की पहचान है 





घरेलू नुस्खों से दूर करें दर्द -
जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसमें सिरदर्द होना एक आम बात है। लेकिन यह दर्द हमारी दिनचर्या में शामिल हो जाए तो हमारे लिए बहुत कष्टदायी हो जाता है। दर्द से छुटकारा पाने के लिए हम पेन किलर घरेलू उपाय अपनाकर इसे दूर कर सकते हैं। इन घरेलू उपायों के कोई साईड इफेक्ट भी नहीं होते।
1. अदरक: अदरक एक दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करती है। यदि सिरदर्द हो रहा हो तो सूखी अदरक को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने माथे पर लगाएं। इसे लगाने पर हल्की जलन जरूर होगी लेकीन यह सिरदर्द दूर करने में मददगार होती है।
2. सोडा: पेट में दर्द होने पर कप पानी में एक चुटकी खाने वाला सोडा डालकर पीने से पेट दर्द में राहत मिलती है। सि्त्रयो के मासिक धर्म के समय पेट के नीचे होने वाले दर्द को दूर करने मे खाने वाला सोडा पानी में मिलाकर पीने से दर्द दूर होता है। एसिडिटी होने पर एक चुटकी सोडा, आधा चम्मच भुना और पिसा हुआ जीरा, 8 बूंदे नींबू का रस और स्वादानुसार नमक पानी में मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है।
3. अजवायन: सिरदर्द होने पर एक चम्मच अजवायन को भूनकर साफ सूती कपडे में बांधकर नाक के पास लगाकर गहरी सांस लेने से सिरदर्द में राहत मिलती है। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक आपका सिरदर्द ठीक नहीं हो जाता। पेट दर्द को दूर करने में भी अजवायन सहायक होती है। पेट दर्द होने पर आधा चम्मच अजवायन को पानी के साथ फांखने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
4. बर्फ : सिरदर्द में बर्फ की सिंकाई करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा स्पॉन्डिलाइटिस में भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है। गर्दन में दर्द होने पर भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है।
5. हल्दी: हल्दी कीटाणुनाशक होती है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए गए हैं। ये तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है। एक चम्मच हल्दी में आधा चम्मच काला गर्म पानी के साथ फांखने से पेट दर्द व गैस में राहत मिलती है।
6. तुलसी के पत्ते: तुलसी में बहुत सारे औषधीय तत्व पाए जाते हैं। तुलसी की पत्तियों को पीसकर चंदन पाउडर में मिलाकर पेस्ट बना लें। दर्द होने पर प्रभावित जगह पर उस लेप को लगाने से दर्द में राहत मिलेगी। एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर हल्का गुनगुना करके खाने से गले की खराश और दर्द दूर हो जाता है। खांसी में भी तुलसी का रस काफी फायदेमंद होता है।
7. मेथी: एक चम्मच मेथी दाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांखने से पेटदर्द में आराम मिलता है। मेथी डायबिटीज में भी लाभदायक होती है। मेथी के लड्डू खाने से जोडों के दर्द में लाभ मिलता है।
8. हींग: हींग दर्द निवारक और पित्तवर्द्धक होती है। छाती और पेटदर्द में हींग का सेवन लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर पकाने और उसे बच्चो की नाभि के चारो ओर उसका लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।
9. सेब: सुबह खाली पेट प्रतिदिन एक सेब खाने से सिरदर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। चिकित्सकों का मानना है कि सेब का नियमित सेवन करने से रोग नहीं घेरते।
10. करेला: करेले का रस पीने से पित्त में लाभ होता है। जोडों के दर्द में करेले का रस लगाने से काफी राहत मिलती है।






Caution on Taj Expressway
आजकल नए बने ताज एक्सप्रेस वे पर रोजाना गाड़ियों के टायर फटने के मामले सामने आ रहे हैं जिनमें रोजाना कई लोगों की जानें जा रही हैं.
एक दिन बैठे बैठे मन में प्रश्न उठा कि आखिर देश की सबसे आधुनिक सड़क पर ही सबसे ज्यादा हादसे क्यूँ हो रहे हैं? और हादसों का तरीका भी केवल एक ही वो भी टायर फटना ही मात्र, ऐसा कोन सी कीलें बिछा दीं सड़क पर हाईवे बनाने वालों ने?
दिमाग ठहरा खुराफाती सो सोचा आज इसी बात का पता किया जाये. तो टीम जुट गई इसका पता लगाने में.
अब सुनिए हमारे प्रयोग के बारे में.
मेरे पास तो इको फ्रेंडली हीरो जेट है सो इतनी हाई-फाई गाडी को तो एक्सप्रेस वे अथोरिटी इजाजत देती नहीं सो हमारे एडमिन पेनल की दूसरी कुराफाती हस्ती को मैंने बुला लिया उनके पास BMW X1 SUV है
(ध्यान रहे असली मुद्दा टायर फटना है)
सबसे पहले हमनें ठन्डे टायरों का प्रेशर चेक किया और उसको अन्तराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ठीक किया जो कि 25 PSI है. (सभी विकसित देशों की कारों में यही हवा का दबाव रखा जाता है जबकि हमारे देश में लोग इसके प्रति जागरूक ही नहीं हैं या फिर ईंधन बचाने के लिए जरुरत से ज्यादा हवा टायर में भरवा लेते हैं जो की 35 से 45 PSI आम बात है).
खैर अब आगे चलते हैं.
इसके बाद ताज एक्सप्रेस वे पर हम नोएडा की तरफ से चढ़ गए और गाडी दोडा दी. गाडी की स्पीड हमनें 150 - 180 KM /H रखी. इस रफ़्तार पर गाडी को पोने दो घंटे दोड़ाने के बाद हम आगरा के पास पहुँच गए थे. आगरा से पहले ही रूककर हमने दोबारा टायर प्रेशर चेक किया तो यह चोंकाने वाला था. अब टायर प्रेशर था 52 PSI .
अब प्रश्न उठता है की आखिर टायर प्रेशर इतना बढ़ा कैसे सो उसके लिए हमने थर्मोमीटर को टायर पर लगाया तोटायर का तापमान था 92 .5 डिग्री सेल्सियस.
सारा राज अब खुल चुका था, कि टायरों के सड़क पर घर्षण से तथा ब्रेकों की रगड़ से पैदा हुई गर्मी से टायर के अन्दर की हवा फ़ैल गई जिससे टायर के अन्दर हवा का दबाव इतना अधिक बढ़ गया. चूँकि हमारे टायरों में हवा पहले ही अंतरिष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थी सो वो फटने से बच गए. लेकिन जिन टायरों में हवा का दबाव पहले से ही अधिक (35 -45 PSI) होता है या जिन टायरों में कट लगे होते हैं उनके फटने की संभावना अत्यधिक होती है.
अत : ताज एक्सप्रेस वे पर जाने से पहले अपने टायरों का दबाव सही कर लें और सुरक्षित सफ़र का आनंद लें. मेरी एक्सप्रेस वे अथोरिटी से भी येविनती है के वो भी वाहन चालकों को जागरूक करें ताकि यह सफ़र अंतिम सफ़र न बने.




तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है. ये हैं उसके तरीके:-
1 – तनाव को पहचानें - यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं उन्हें यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करने के उपाय करना आसान हो जायेगा. स्वयं को दस मिनट दें और सोचें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितने बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ, बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बनाती हैं? टॉप 10 की एक लिस्ट बनायें और देखें कि क्या आप उनमें कुछ परिवर्तन ला सकते हैं या नहीं. एक-एक करके उन्हें सुधारते जाएँ और प्रयासरत रहें.
2 – अनावश्यक संकल्पों को छोड़ दें - हम अपने जीवन में कई सारे संकल्प करते हैं – हमें यह करना है – हमें वह करना है. पत्नी, बच्चे, कामकाज, घर-गृहस्थी, समाज, धर्म, शौक, और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े कई सारे संकल्पों को हम पूरा करने में लगे रहते हैं. इनमें से प्रत्येक की समीक्षा करें. क्या ऐसा कुछ है जो अच्छे परिणाम की अपेक्षा तनाव देता है. इस कार्य को निर्ममतापूर्वक करने की ज़रुरत है. जो कुछ भी आपके शुख-शांति के रास्ते में आता है उसे बेवज़ह ढोने में कोई तुक नहीं है. उस संकल्प को पहले दूर करें जो ज्यादा तनाव देता हो.
3 – टालमटोल करने की प्रवृत्ति छोडें - हम सभी ऐसा करते हैं. इसके कारण काम का दबाव बढ़ता जाता है. ‘अभी ही करना है’ की आदत डाल लें. अपने इनबॉक्स और टेबल को साफ़ रखें.
4 – व्यवस्था लायें - कुछ हद तक सभी व्यक्ति अव्यवस्था के बीच रहते हैं. यदि हम व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास करें और इसमें प्रारंभ में सफल हो भी जाएँ तो भी अव्यवस्था को जगह बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. अपने माहौल में अव्यवस्था रखने से तनाव बढ़ता है. इससे हमें चीज़ें तलाशने में देर लग जाती है और कामकाज में बाधा आती है. अपने परिवेश में व्यवस्था लायें. शुरुआत अपनी टेबल और दराज़ से करें. घर के किसी एक कोने से शुरुआत करें. पूरे घर को दुरुस्त करना ठीक न होगा. छोटे से हिस्से से शुरुआत करें और व्यवस्था को वहां से आगे फैलने दें.
5 – जल्दी उठें - देर से उठना कई परेशानियों की जड़ है. किसी दिन 15 मिनट देर से उठें तो पाएंगे की रोजमर्रा के सभी काम करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कामकाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. जल्दी उठने की आदत डालें. इसी के साथ जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए. काम पर जल्दी निकालने से आप ट्रेफिक की समस्या से बच जाते हैं और ड्राइविंग में मज़ा भी आता है. यह जांचें की आपको तैयार होने में कितना समय लगता है और कहीं पहुँचने में कितना समय लगता है. इस समय को कम करके न आंकें. एक छोटा सा अंतराल भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सिर्फ दस मिनट का परिवर्तन लाकर देखें. आपको फर्क पता चलेगा.
6 – दूसरों को नियंत्रित न करें - याद रखें, हम सारी दुनिया के मालिक नहीं हैं. हम चाहते तो हैं कि ऐसा होता लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम ऐसा ख्याल ही अपने मन में पाल लें. हम चीज़ों और लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं और इसमें सफल नहीं हो पाते. इससे तनाव बढ़ता ही है. दूसरी चीज़ें जैसी घटित होती हैं और दूसरे लोग जैसे काम करते हैं उसे स्वीकार कर लें. यह भी स्वीकार कर लें कि अलग-अलग परिस्थितियों में चीज़ें एक ही तरह से नहीं होतीं. धयान रखें, आप केवल स्वयं पर ही नियंत्रण रख सकते हैं. इसीलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले स्वयं को काबू में रखने का काम करें. यह भी सीखें कि स्वयं पर काम थोपने के बजाय आप दूसरों से भी उसे करवा सकते हैं. हममें दूसरों को अपने अधीन रखने कि अदम्य इच्छा होती है. इससे बचने में ही हमारी भलाई है. यह जीवन को तनावमुक्त रखता है.
7 – मल्टीटास्किंग बंद करें - मल्टीटास्किंग का अर्थ है एक साथ कई काम करना, जैसे कम्प्युटर कर लेता है. कई लोग इसे बहुत बड़ा गुण समझते हैं लेकिन हकीकत में इसके नुकसान अधिक हैं. यह हमारी काम करने की गति को सुस्त और बाधित कर देता है. इससे काम के ज़रूरी पक्षों से ध्यान हट भी सकता है. यह तनाव बढ़ाता है. एक वक़्त में एक ही काम करें.
8 – ऊर्जा का क्षय रोकें - यदि आपने पहली स्टेप में बताये अनुसार तनाव उत्पन्न करनेवाले कारणों की पहचान की है तो आपने शायद ऐसे काम भी नोट किये होंगे जो आपकी ऊर्जा को सिर्फ नष्ट करते हैं. कुछ काम ऐसे होते हैं जिनमें दूसरे कामों कि अपेक्षा ज्यादा ऊर्जा और समय लगता है. उन्हें पहचानें और हटायें. जिंदगी बेहतर जीने के लिए भरपूर ऊर्जा का होना जरूरी है.
9 – मुश्किल लोगों से दूर रहें - क्या आप उन्हें जानते हैं? ये लोग हैं आपके बौस, कलीग, कस्टमर, दोस्त, परिजन, आदि. कभी-कभी ये ही हमारी ज़िन्दगी को मुश्किल बना देते हैं. उनसे लड़ना ठीक न होगा इसलिए उन्हें टालने में ही भलाई है.
10 – सरलीकरण करें - अपनी दिनचर्या को सरल-सहज करना बहुत ज़रूरी है. अपने संकल्प, सूचना-व्यवस्था, आवास और कार्यस्थल, और जीवन में घटित हो रही बातों को सरल बनाना ज़रूरी है. इसके अच्छे परिणाम होते हैं. इसके लिए इसी ब्लौग पर कुछ और लेखों में सुझाव बताये गए हैं.
11 – स्वयं को समय दें - स्वयं को थोडा अधिक समय देने का प्रयास करें. ज़रूरी नहीं है कि हर काम घड़ी देखकर किया जाए. समय की कमी हो तो मीटिंग टाल दें. यदि फोन या ई-मेल से बात बनती हो तो मिलने की क्या ज़रुरत है? यदि यह संभव न हो तो मीटिंग का कोई वक़्त फिक्स न करें. लोगों से कहें कि वे आपको फोन करके पूछ लें कि आप फ्री हैं या नहीं. इस तरह कभी-कभार बचने वाले थोड़े-थोड़े समय को स्वयं को देने में या पसंदीदा काम करने में लगायें.
12 – धीरे करें - आपाधापी में लगे रहने के बजाय थोडी कम रफ़्तार से काम करने में चीज़ें बेहतर तरीके से होती हैं. आननफानन टाइप करके बाद में गलतियाँ सुधारने से बेहतर है कि धीरे टाइप करें. खाने का लुत्फ़ उठायें, लोगों से मन बहलायें, दुनिया देखें. तनाव दूर करने में यह टिप बड़ी कारगर है.
13 – दूसरों की मदद करें - यह टिप विरोधाभासी नहीं है. यह न सोचें कि आप तो वैसे ही काम के बोझ तले दबे हुए हैं और दूसरों कि मदद करके तो आपका कचूमर ही नक़ल जायेगा. दूसरों की मदद करने से, स्वयंसेवक के बतौर काम करने से, या चैरिटी संगठन में काम करने से आप भीतर से बहुत अच्छा अनुभव करते हैं और यह आपका तनाव दूर करता है. यदि आप दूसरों पर नियंत्रण ही करना जानते हैं तो यह आपके लिए कुछ मुश्किल होगा. यदि आप इसे बहुत सरसरे तरीके से करते हैं तो इसका लाभ आपको न मिलेगा. इसे सहजता और सद्भावना से करें. दूसरों का जीवन बेहतर होगा तभी आपका जीवन बेहतर बनेगा.
14 – ज़रा सा आराम करते चलें - कामकाज के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना सही रहता है. यदि आप दो घंटों से काम में भिडे हुए हैं तो जरा ठहरें. अपने कन्धों और बांहों को आराम देने के लिए फैलाएं. टहलें, पानी पियें. बाहर जाएँ, खुला आसमान देखें, ताजी हवा में साँस लें. किसी से बात करें. रचनात्मकता अच्छी बात है लेकिन जीवन उससे ज्यादा कीमती है. अपनी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी थोड़ा नियंत्रण रखें.
15 – काम छोड़ दें - यह भयावह टिप है. इसे कर पाना सबके बस की बात नहीं है. सच कहूँ तो आपका कामकाज या नौकरी आपके तनाव का सबसे बड़ा कारण है. यदि आपको आर्थिक मोर्चे पर कुछ सुरक्षा हासिल है तो ज़रा सोचें – क्या आप नौकरी के बदले कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आप सदैव करना चाहते थे. यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो आपके जीवन में एड़ी से चोटी तक परिवर्तन आ जायेगा. केवल यही टिप आपका तनाव ९०% तक कम कर सकती है. इसे यूँ ही टालने की बजाय गंभीरता से लें – शायद ऐसी कई संभावनाएं हों जिनकी ओर आपका ध्यान नहीं गया हो.
16 – ज़रूरी कामों की लिस्ट बनायें - क्या इसके बारे में भी विस्तार से बताना पड़ेगा? ज़रूरी कामों को प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए एक लिस्ट बना लेना चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए.
17 – कसरत करना - इसके कई लाभ हैं. शारीरिक और मानसिक स्तर पर यह बहुत प्रभावशील है. यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ तनाव से भी कुशलता से निपटती है. एक स्वस्थ और फिट व्यक्ति थकान और दबाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है. दूसरी ओर, अस्वस्थ होना स्वयं में बहुत बड़ा घाटा है. कसरत हमें रोग और तनाव से दूर रखती है.
18 – अच्छा खाएं - यह कसरत करने जितना, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. सम्यक, संतुलित, और सात्विक आहार शरीर और मन को पुष्ट करता है. तला हुआ चटपट खाना हाजमे को ख़राब करता है और शरीर को बोझिल बनाता है.
19 – आभारी बनें - यदि आप दूसरों का आभार व्यक्त करते हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम होते हैं. आपके जीवन से ऋणात्मक सोच बाहर निकलती है. दूसरे भी आपकी इस क्रिया से अच्छा अनुभव करते हैं. अपने जीवन में आपने जो कुछ भी पाया है और जिन व्यक्तियों का साथ आपको मिला है उसे उपहार मानकर उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करें. जीवन के प्रति इस प्रकार का दृष्टिकोण रखकर आप अपने जीवन में सुख और शांति के आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. यह आत्मिक समृद्धि का सूत्र है.
20 – ज़ेन जैसे परिवेश का निर्माण - ऊपर बताये गए अनुसार अपनी टेबल और दराज़ को व्यवस्थित करने का प्रयास करें. ऐसा करने के बाद उस व्यवस्था को और दूसरे स्थानों की ओर फैलने का अवसर प्रदान करें जब तक आपके इर्दगिर्द सरल, शांत, ज़ेन जैसे परिवेश का निर्माण न हो जाए. ऐसे परिवेश में जीने और काम करने से जीवन में अतुलनीय शांति और रचनात्मकता आती है और तनाव और दबाव कोसों दूर हो जाते हैं.





Health
स्वास्थ्यवर्धक सौंफ ---------
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मस्तिष्क संबंधी रोगों में सौंफ अत्यंत गुणकारी है। यह मस्तिष्क की कमजोरी के अतिरिक्त दृष्टि-दुर्बलता, चक्कर आना एवं पाचनशक्ति बढ़ाने में भी लाभकारी है। इसके निरंतर सेवन से दृष्टि कमजोर नहीं होती तथा मोतियाबिंद से रक्षा होती है।
* उलटी, प्यास, जी मिचलाना, पित्त-विकार, जलन, पेटदर्द, अग्निमांद्य, पेचिश, मरोड़ आदि व्याधियों में यह लाभप्रद है।
* सौंफ, धनिया व मिश्री का समभाग चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद लेने से हाथ-पाँव तथा पेशाब की जलन, अम्लपित्त (एसिडिटी) व सिरदर्द में आराम मिलता है।
* सौंफ और मिश्री का समभाग चूर्ण मिलाकर रखें। दो चम्मच मिश्रण दोनों समय भोजन के बाद एक से दो माह तक खाने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा जठराग्नि तीव्र होती है।
* बच्चों के पेट के रोगों में दो चम्मच सौंफ का चूर्ण दो कप पानी में अच्छी तरह उबाल लें। एक चौथाई पानी शेष रहने पर छानकर ठण्डा कर लें। इसे एक-एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन-चार बार पिलाने से पेट का अफरा, अपच, उलटी (दूध फेंकना), मरोड़ आदि शिकायतें दूर होती हैं।
* आधी कच्ची सौंफ का चूर्ण और आधी भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग कराएं इससे गैस और अपच दूर हो जाती है।
* भूनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है।
* बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर भागों में लेकर पीसकर भर दें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद 1 टी स्पून लें। इससे स्मरणशक्ति बढ़ती है।
* 5-6 ग्राम सौंफ लेने से लीवर ठीक रहता है और आंखों की ज्योति बढ़ती है।
* तवे पर भुनी हुई सौंफ के मिक्स्चर से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है। दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।
* सौंफ की ठंडाई बनाकर पीएं। इससे गर्मी शांत होगी। हाथ-पाव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर, मिश्री मिलाकर खाना खाने के बाद 5 से 6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।
* अगर गले में खराश हो गई है तो सौंफ चबाना फायदेमंद होता है।
* सौंफ चबाने से बैठा हुआ गला भी साफ हो जाता है। रोजाना सुबह-शाम खाली सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे त्वचा चमकती है। वैसे तो सौंफ का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इससे कई प्रकार के छोटे-मोटे रोगों से निजात मिलती है।






अमीर आदमी था.
उसने समुद्र मेँ अकेले घुमने के
लिए एक नाव बनवाई.,
छुट्टी के दिन वह नाव
लेकर समुद्र की सैर करने
निकला.
आधे समुद्र तक
पहुचा ही था कि अचानक
एक जोरदार तुफान आया.
उसकी नाव पुरी तरह से
तहस-नहस हो गई लेकिन
वह लाईफ जैकेट की मदद से
समुद्र मेँ कूद गया.
जब तूफान शांत हुआ तब वह
तैरता तैरता एक टापू पर
पहुँचा लेकिन वहाँ भी कोई
नहीँ था.
टापू के चारोँ ओर समुद्र के
अलावा कुछ भी नजर
नहीँ आ रहा था.
उस आदमी ने सोचा कि अब
पूरी जिदंगी मेँ
किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे
साथ ऐसा क्यूँ हुआ..?
उस
आदमी को लगा कि भगवान
ने मौत से बचाया तो आगे
का रास्ता भी भगवान
ही बताएगा.
धीरे धीरे वह वहाँ पर उगे
झाड-पत्ते खाकर दिन
बिताने लगा.
अब धीरे-धीरे
उसकी श्रध्दा टूटने
लगी भगवान पर से
उसका विश्वास उठ गया.
उसको लगा कि इस
दुनिया मेँ भगवान है
हि नहीँ.!
फिर उसने सोचा कि अब
पूरी जिंदगी यहीँ इस
टापू पर बितानी है
तो क्यूँ ना एक
झोपडी बना लूँ..?
फिर उसने झाड
कि डालियो और पत्तो से
एक
छोटी सी झोपडी बनाई.
उसको लगा कि आज
से झोपडी मेँ सोने
को मिलेगा आज से बाहर
नहीँ सोना पडेगा.
रात हुई
ही थी कि अचानक मौसम
बदला बिजलियाँ जोर
जोर से गिडगिराने लगीँ.!
तभी अचानक एक
बिजली उस झोपडी पर आ
गिरी और झोपडी धधकते
हुए जलने लगी.
यह देखकर वह आदमी टूट
गया आसमान की तरफ
देखकर बोला
तू भगवान नहीँ , राक्षस
है,
तुझमे दया जैसा कुछ है
ही नहीँ तू बहुत क्रुर है.
हताश होकर सर पर हाँथ
रखकर रो रहा था.
कि अचानक एक नाव टापू
के पास आई.
नाव से उतरकर
दो आदमी बाहर आये.
और बोले कि, हम तुम्हेँ
बचाने आये हैँ,
तुम्हारा जलता हुआ
झोपडा देखा तो लगा कि कोई
उस टापू पर मुसीबत मेँ है.!
अगर तुम
अपनी झोपडी नही जलाते
तो हमेँ
पता नही चलता कि टापू
पर कोई है!
उस आदमी कि आँखो से आँसु
गिरने लगे.
उसने ईश्वर से
माफी माँगी और
बोला कि मुझे
क्या पता कि आपने मुझे
बचाने के लिए
मेरी झोपडी जलाई थी !
सरलता और सहजता ही जीवन में सफलता का मंत्र हैं। ये दोनों तत्व मनुष्य को सौभाग्यशाली बनाते हैं क्योंकि सहज रहने से तनाव उत्पन्न नहीं होता और सरल रहने से अनावश्यक कामना। अनावश्यक कामना और तनाव ही दुर्भाग्य का कारण बनते हैं और सरलता और सहजता इन दोनों की तत्वों का पतन करते हैं। सरलता है न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ जीवन यापन। जीवन के कठिन मार्ग में ईश्वर का आशीर्वाद ही जीवन को सरल बनता है। सरलता का दूसरा नाम है सहजता। सहजता की प्राप्ति कठिन और जटिल परिस्थितियों से पार पाने का मार्ग प्रशस्त करती है।



उपलब्धियाँ अक्सर एकांगी होती है और इनसे प्राप्त अहंकार जीवन को एकरंगी बना देता है। जीवन तो भिन्न- भिन्न अनुभव लेने से समृद्ध होता है।
एक क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करके चादर तान के सो गये और मन में सोच लिया कि संसार फतेह कर लिया तो बहुत बड़ी भूल-भूलैया में फँस गये।
दौलत तुमने बहुत कमा ली या माता-पिता से मिल गयी और इसी कारण फूले-फूले रहने लगे तो तब तो तुम बहुत बड़े गरीब रह गये जीवन में। धन की अधिकता में तुमसे जीवन भर यह अहसास तो अनछुआ ही रह जायेगा कि अभाव क्या है?
बहुत बड़े पद पर पहुँच गये हो तो इस बात का अहंकार मत करना कि बस अब सारा जीवन तुम्हारी मुट्ठी में आ गया है, तुम अपने विभाग के सबसे छोटे पद पर काम करने वाले कर्मचारी के जीवन से एकदम अपरिचित हो। वह क्या सोचता है? उसकी क्या सीमायें हैं?
पाने का ही नाम जीवन नहीं है बल्कि अभाव भी एक जीवंत अनुभव है।
तुम बहुत बड़े कवि बन गये हो, पर जरा सोचो तो कि कितने अच्छे अच्छे गद्य लेखक दुनिया में तुम्हारे साथ ही विचरण कर रहे हैं और तुमने अभी तक श्रेष्ठ किस्म का गद्य रचने का आनंद नहीं लिया।
तुम तो सिर्फ अपने जैसा जीवन जानते हो। दिन के बहुत सारे घंटे व्यवसाय में ऊँचाई पाकर किसी बड़े पद पर आसीन होने की मह्त्वाकांक्षा का पीछा करने में खर्च हो जाते हैं तो ऐसी जीवनशैली से उत्पन्न व्यस्तता और अहंकार से तुम बहुत सारे अन्य तरह के भावों से अनभिज्ञ ही रह जाओगे।
अपने से अलग लोगों को, भले ही वे तुम्हारे सामने आर्थिक रुप से गरीब हों, उपलब्धियों में कमतर लगते हों, निम्न भाव से न देखना, किसी न किसी मामले में वे तुमसे ज्यादा उपलब्धि रखते होंगे।
केवल सफलतायें तुम्हे बहुत गहरे नहीं ले जा सकतीं। तुम्हे इसे भी जानना है कि असल में असफलता क्या है?
जब तक एक ही भाव के दोनों पूरक हिस्सों को नहीं जान लोगे तब तक दोनों ही से परे होने का अहसास नहीं जान पाओगे।
न पाने में अटकना है और न ही अभाव में। किसी भी एक भाव में अटक गये तो जीवन बेकार ही जाने के पूरे पूरे आसार बन जाते हैं। जीवन तो इन सब भावों से परे जाने के लिये है और इसके लिये एक भाव के दोनों परस्पर विपरित रुपों को जानना, पहचानना और जीना आवश्यक है।
किसी भी क्षेत्र में उपलब्धि पाना बहुत बड़ी योग्यता है और इसके लिये जीतोड़ प्रयास करो पर उपलब्धियों का अहंकार भूल कर भी न करो।
वास्तव में उपलब्धि जनित अहंकार का अकेला तत्व ही मनुष्य के जीवन को गरीब बना कर छोड़ देता है। इस अहंकार की उपस्थिति में आध्यात्मिक विकास असंभव है।
ये सब साधारण उपलब्धियाँ, जो तुम्हे बहुत बड़ी लगती हैं, और ये सारे अभाव जो तुम्हे बहुत बड़े लगते हैं, ये सारी बातें माध्यम हैं तुम्हे एक बड़े लक्ष्य की यात्रा से दूर रखने के। इन्ही सब बातों में अटक गये तो इन्ही के होकर रह गये।
जब जीवन में साधारण उपलब्धियों और अभावों से गुजर जाओगे तब तुम्हे आभास होगा उस अभाव का जिसे भरने के लिये की गयी यात्रा ही मनुष्य जीवन में सार्थकता ला पाती है।
बस साक्षी बने रहो, एक दिन वह प्यास जगेगी जरुर, एक दिन तुम उस परम यात्रा पर निकलोगे जरुर।
Story
एक बार एक त्यागी संत भिक्षा मांगते हुए एक सेठ के घर पहुचे , संत की सारगर्भित बाते सुनकर सेठ बड़ा प्रभावित
हुआ , तथा मन में कुछ पाने की लालसा रखकर उसने संत को प्रणाम किया , परन्तु संत उसके मन की बात समझ गए ,
अतः उन्होंने भी पलटकर सेठ को प्रणाम किया , तब सेठ ने आश्चर्य से पूछा - आपने मुझे क्यों प्रणाम किया ?
तब संत ने भी यही प्रश्न दोहराया , तो सेठ ने कहा की आप तो बड़े त्यागी है , आपने तो स्त्री , पुत्र , धन , जमीन-जायदाद
आदि सभी का त्याग कर दिया है , तब संत ने बड़े शांत चिर्त हो कर कहा- अच्छा तुम ही मुझे एक बात बताओ-
" भगवान् बड़ा है या रुपया-पैसा " ? तब सेठ ने कहा - माहात्मन नि-संदेह इन सबसे बड़े तो भगवान् ही है, तब संत ने कहा की इसीलिए तो
तुम बड़े त्यागी हुए , जो बड़ा त्याग करे वह बड़ा त्यागी , जो छोटा त्याग करे वह छोटा त्यागी , एव तुम तो बड़े त्यागी हो, क्योकि जिसने संसार के सुखो के लिए भगवान् तक का त्याग कर रखा है ,
यह सुनकर सेठ संत के चरणों में गिर पड़ा .............


एक गरीब माँ के छोटे बच्चे ने जब दुकान पर
आईसक्रीम देखी तो उसने अपनी माँ से कहा कि
मुझे ये दिलाओ ना
मगर
उसगरीब माँ के पास पैसे नी थे
तो वह खडी खडी रोने लगी और अपनी दर्द
भरी आवाज मे दुनिया को कुछ ये कहने लगी
मेरी गरीबी को देख जमाना मुस्कुराता है
तेरी शोहरत के आगे ये सर झुकाता है
तेरी गलती को भी ये सही करार देते है
मेरे सही होने पर भी ये मुझे मार देते है
तेरे सुख मे है सुखी और मेरे दुःख से अनजान है
क्यो है इतना फर्क जब हम दोनो एक समान है
मै भी तो इंसान हु और तु भी तो इंसान है
मै एक जोडी कपडे मे ही मर जाया करती हु
पेट भर खाना तो कभी कभी खाया करती हु
तुने कपडो का भडार लगा दिया
खाना तुने तो क्या तेरे कुतो ने भी खा लिया
कुते को करते हो प्यार और मेरा करते अपमान है
क्यो है इतना फर्क जब हम दोनो एक समान है
मै भी तो इंसान हु ओर तु भी तो इंसान है
सच मै अमीरी और गरीबी रुपी दिवार जब हमारे देश मे
से ढह जाएगे
उस दिन कोई भी माँ आसु नही बहाएगी.

Wednesday, 30 October 2013

एक बार मुझे मेरे गाँव का सरपंच बना दिया गया..
गाँव वालो ने सोचा की छोरा पड़ा लिखा है...समझदार है, अगर ये सरपंच बन गया तो गाँव की भलाई के लिए काम करेगा..

मौसम बदला, सर्दियों के आने के महीने भर पहले गाँव वालो ने मुझसे पूछा की - सरपंच साहब इस बार सर्दी कितनी तेज पड़ेगी..
मैंने गाँव वालों से कहा की मैं आपको कल बताऊंगा..

मैं तुरंत ही शहर की और निकल गया..वहा जाकर मौसम विभाग में पता किया तो मौसम विभाग वाले बोले - की सरपंच साहब इस बार बहुत तेज सर्दी पड़ने वाली है..

मैंने भी दुसरे दिन गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया...
गाँव वालो को विश्वास था की अपने सरपंच साहब पढ़े लिखे हैं..शहर से पता करके आये हैं तो सही कह रहे होंगे..गाँव वालो की नजर में मेरी इज्जत और बढ़ गयी..

तेज सर्दिया पड़ने की बात सुनकर गाँव वालो ने सर्दी से बचने के लिए लकडिया इक्कठी करनी शुरू कर दी.
महीने भर बाद जब सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा तो गाँव वालो ने मुझसे फिर पूछा..मैंने उन्हें फिर दुसरे दिन के लिए टाला..और शहर के मौसम विभाग में पहुँच गया..

मौसम विभाग वाले बोले की सरपंच साहब आप चिंता मत करो इस बार सर्दियों के सरे रिकॉर्ड टूट जायेंगे..

मैंने ऐसा ही गाँव में आकर बोल दिया..मेरी बात सुनकर गाँव वाले पागलो की तरह लकडिया इक्कठी करने लग गए..

इस तरह पंद्रह दिन और बीत गए लेकिन सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा..गाँव वाले फिर मेरे पास आये..मैं फिर मौसम विभाग जा पहुंचा..
मौसम विभाग वालो ने फिर वही जवाब दिया की सरपंच साहब आप देखते जाइये की सर्दी क्या जुलम ढाती है ?

मैंने फिर से गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया..अब तो गाँव वाले सारे काम धंधे छोड़कर सिर्फ लकडिया इक्कठी करने के काम में लग गए..
इस तरह पंद्रह दिन और बीत गए..

लेकिन सर्दिया शुरू नहीं हुई..

गाँव वाले मुझे कोसने लगे..मैंने उनसे एक दिन का वक्तऔर माँगा..
में तुरंत मौसम विभाग पहुंचा तो उन्होंने फिर ये जवाब दिया की सरपंच साहब इस बार सर्दियों के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं..

अब मेरा भी धैर्य जवाब दे गया..

मैंने पूछा - आप इतने विश्वास से कैसे कह सकते हैं.

मौसम विभाग वाले बोले - की सरपंच साहब हम पिछले दो महीने से देख रहे हैं...पड़ोस के गाँव वाले पागलो की तरह लकडिया इक्कठी कर रहे हैं..इसका मतलब सर्दी बहुत तेज पड़ने वाली है.....