Stone (Pathri) Health
Ek Achook ilaaj stone (Pathhri) nikalne ka...
Stone (Pathri) nikalne ka ram-baan ilaaj
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Vidhi - Ek se 2 glass apple juice subah murli ke baad as breakfast lena hai. uske baad pura din aur kuch bhi nahi khana hai. Next 6 days issi tarah se rehna hai bina anna (Food) ka ek bhi dana khaye. Bhookh (Hunger) lagne per sirf apple khana hai ya pani pina hai. 7th day shaam ko karib 6 baje patli moong ki daal ki khichdi khani hai, aur uske thik 2hrs ke baad adha (1/2) ya pona (3/4) katori olive oil leker usmein 1-2 nimboo ka ras mila ker pina hai. next morning horrible loose motions honge aur pathhri (stone) bhi saath mein nikal jayegi. Isko 100% successful achook ilaaj bataya jata hai.
Lets have try once atleast. (Special attention - Eat only Apples & Water for 7 days).
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Vidhi - Ek se 2 glass apple juice subah murli ke baad as breakfast lena hai. uske baad pura din aur kuch bhi nahi khana hai. Next 6 days issi tarah se rehna hai bina anna (Food) ka ek bhi dana khaye. Bhookh (Hunger) lagne per sirf apple khana hai ya pani pina hai. 7th day shaam ko karib 6 baje patli moong ki daal ki khichdi khani hai, aur uske thik 2hrs ke baad adha (1/2) ya pona (3/4) katori olive oil leker usmein 1-2 nimboo ka ras mila ker pina hai. next morning horrible loose motions honge aur pathhri (stone) bhi saath mein nikal jayegi. Isko 100% successful achook ilaaj bataya jata hai.
Lets have try once atleast. (Special attention - Eat only Apples & Water for 7 days).
जिंदगी का एक कड़वा मजाक..............
वकील चाहता है कि हम किसी विवाद में पड़ें ...
चिकित्सक चाहता है कि हम बीमार पड़ें...
पुलिस चाहती है कि हम कुछ अपराध करें...
अध्यापक की नज़रों में हम पैदाइशी बेवकूफ हैं...
कफ़न बनाने वाला चाहता है कि हम मर जाएँ... पर
केवल एक चोर चाहता है कि हम सुख की नींद सोएं और धनवान रहें ।
Health
गरम पानी पीने के फायदे -
सफाई और शुद्धी- यह शरीर को अंदर से साफ करता है। अगर आपका पाचन तंत्र सही नहीं रहता है, तो आपको दिन में दो बार गरम पानी पीना चाहिये। सुबह गरम पानी पीने से शरीर के सारे विशैले तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे पूरा सिस्टम साफ हो जाता है। नींबू और शहद डालने से बड़ा फायदा होता है।
कब्ज दूर करे - शरीर में पानी की कमी हो जाने की वजह से कब्ज की समस्या पैदा हो जाती है। रोजाना एक ग्लास सुबह गरम पानी पीने से फूड पार्टिकल्स टूट जाएंगे और आसानी से मल बन निकल जाएंगे। मोटापा कम करे- सुबह के समय या फिर हर भोजन के बाद एक ग्लास गरम पानी में नींबू और शहद मिला कर पीने से चर्बी कम होती है। नींबू मे पेकटिन फाइबर होते हैं जो बार-बार भूख लगने से रोकते हैं।
अनानास के औषधीय प्रयोग -------
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"1 अजीर्ण (अपच) होने पर:-*पके अनानास के बारीक टुकड़े को सेंधा नमक और कालीमिर्च मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है।
*पके अनानास के 100 ग्राम रस में 1-2 पीस अंगूर और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधा नमक मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है।
*भोजन के बाद यदि पेट फूल जाये, बैचेनी हो तो अनानास के 20-50 ग्राम रस के सेवन से लाभ होता है।
* अनानास और खजूर के टुकड़े बराबर-बराबर लेकर उसमें घी और शहद मिलाकर कांच के बरतन में भरकर रखें। इसे नित्य 6 या 12 ग्राम की मात्र
ा में खाने से बहुमूत्र रोग दूर होता है और शक्ति बढ़ती है।"
*पके अनानास के 100 ग्राम रस में 1-2 पीस अंगूर और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधा नमक मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है।
*भोजन के बाद यदि पेट फूल जाये, बैचेनी हो तो अनानास के 20-50 ग्राम रस के सेवन से लाभ होता है।
* अनानास और खजूर के टुकड़े बराबर-बराबर लेकर उसमें घी और शहद मिलाकर कांच के बरतन में भरकर रखें। इसे नित्य 6 या 12 ग्राम की मात्र
ा में खाने से बहुमूत्र रोग दूर होता है और शक्ति बढ़ती है।"
2 पेट में बाल चला जाने पर:-*पका हुआ अनानास खाने से पेट में बाल चले जाने से उत्पन्न हुई पीड़ा खत्म हो जाती है।
*पके अनानास के छिले हुए टुकड़ों पर कालीमिर्च और सेंधा नमक डालकर खाने से खाया हुआ बाल कांटा या कांच पेट में गल जाता है।"
*पके अनानास के छिले हुए टुकड़ों पर कालीमिर्च और सेंधा नमक डालकर खाने से खाया हुआ बाल कांटा या कांच पेट में गल जाता है।"
3 बहुमूत्र (पेशाब का बार-बार आना) का रोग:-*पके हुए अनानास को काटकर उसमें कालीमिर्च का चूर्ण और चीनी मिलाकर खाना चाहिए।
* अनानास के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पीपर का चूर्ण छिड़कर खाने से बहुमूत्र का रोग दूर हो जाता है। पके अनानास का छिलका और उसके भीतर का अंश निकालकर शेष भाग का रस निकाल लें फिर इसमें जीरा, जायफल, पीपर कालानमक और थोड़ा-सा अम्बर डालकर पीने से भी बहुमूत्र का रोग मिटता है।
* अनानास के टुकड़ों पर पीपर का चूर्ण डालकर खाने से बहुमूत्र के विकार में बहुत लाभ होता "
* अनानास के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पीपर का चूर्ण छिड़कर खाने से बहुमूत्र का रोग दूर हो जाता है। पके अनानास का छिलका और उसके भीतर का अंश निकालकर शेष भाग का रस निकाल लें फिर इसमें जीरा, जायफल, पीपर कालानमक और थोड़ा-सा अम्बर डालकर पीने से भी बहुमूत्र का रोग मिटता है।
* अनानास के टुकड़ों पर पीपर का चूर्ण डालकर खाने से बहुमूत्र के विकार में बहुत लाभ होता "
4 अनानास का मुरब्बा:-पके अनानास के ऊपर का छिलका और बीच का सख्त हिस्सा निकाल लें, उसके बाद फल के छोटे-छोटे टुकड़े करके उन्हें एक दिन चूने के पानी में रखें। दूसरे दिन उन्हें चूने के पानी में से बाहर निकालकर सुखा दें। उसके बाद चीनी की चाशनी बनाकर अनन्नास के टुकड़ों को उसमें डाल दें। इसके बाद नीचे उतार लें और ठंडा होने पर उसमें थोड़ी-सी इलायची पीसकर, थोड़ा गुलाब जल को डालकर मुरब्बा बनाकर सुरक्षित रख लें। यह मुरब्बा पित्त का शमन करता है और मन को प्रसन्न करता है।
5 शरीर की गर्मी को शांत करने वाला:-पके अनानास के छोटे-छोटे टुकड़े करके उनको कुचलकर रस निकालें उसके बाद इस रस से दुगुनी चीनी लेकर उसकी चासनी बनाएं। इस चाशनी में अनन्नास का रस डालकर शर्बत बनाएं। यह योग गर्मी को नष्ट करता है, हृदय को बल प्रदान करता है और पित्त को प्रसन्न करता है।
6 रोहिणी या कण्ठ रोहिणी:- अनानास का रस रोहिणी की झिल्ली को काट देता है, गले को साफ रखता है। इसकी यह प्रमुख प्राकृतिक औषधि है। ताजे में अनानास पेप्सिन पित्त का एक प्रधान अंश होता है जिसमें गले की खराश में लाभ होता है।
7 सूजन:-*शरीर की सूजन के साथ पेशाब कम आता हो, एल्बब्युमिन मूत्र के साथ जाता हो, मंदाग्नि हो, आंखों के आस-पास और चेहरे पर विशेष रूप से सूजन हो तो ऐसी दशा में नित्यप्रति अनन्नास खायें और खाने में सिर्फ दूध पर रहें। तीन सप्ताह में लाभ हो जाएगा।
*100 ग्राम की मात्रा में रोजाना अनानास का जूस (रस) पीने से यकृत वृद्धि के कारण होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।
*रोजाना पका हुआ अनानास खाने और भोजन में केवल दूध का प्रयोग करने से पेशाब के कम आने के कारण, यकृत बढ़ने के कारण, भोजन के अपच आदि कारणों से आने वाली सूजन दूर हो जाती है। ऐसा लगभग 21 दिनों तक करने से सूजन पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
* अनानास के पत्तों पर एरंड तेल चुपड़कर कुछ गर्म करें और सूजन पर बांध दें। इससे सूजन विशेषकर पैरों की सूजन तुरंत दूर हो जाती है।
* अनानास का रस पीने से 7 दिनों में ही शारीरिक सूजन नष्ट होती है।"
*100 ग्राम की मात्रा में रोजाना अनानास का जूस (रस) पीने से यकृत वृद्धि के कारण होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।
*रोजाना पका हुआ अनानास खाने और भोजन में केवल दूध का प्रयोग करने से पेशाब के कम आने के कारण, यकृत बढ़ने के कारण, भोजन के अपच आदि कारणों से आने वाली सूजन दूर हो जाती है। ऐसा लगभग 21 दिनों तक करने से सूजन पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
* अनानास के पत्तों पर एरंड तेल चुपड़कर कुछ गर्म करें और सूजन पर बांध दें। इससे सूजन विशेषकर पैरों की सूजन तुरंत दूर हो जाती है।
* अनानास का रस पीने से 7 दिनों में ही शारीरिक सूजन नष्ट होती है।"
8 शक्तिवर्द्धक:-अनन्नास घबराहट को दूर करता है। प्यास कम करता है, शरीर को पुष्ट करता है और तरावट देता है। खांसी-जुकाम नहीं करता। दिल और दिमाग को ताकत देता है। अनन्नास का रस पीने से शरीर के अस्वस्थ अंग स्वस्थ हो जाते हैं। गर्मियों में अनन्नास का शर्बत पीने से तरी, ताजगी और ठंडक मिलती है, प्यास बुझती है, पेट की गर्मी शांत होती है, पेशाब खुलकर आता है पथरी में इसीलिए यह लाभकारी है।
9 फुन्सियां:- अनानास का गूदा फुन्सियों पर लगाने से लाभ होता है।
10 मोटापा होने पर:-प्रतिदिन अनानास खाने से स्थूलता नष्ट होती है, क्योंकि अनानास वसा (चर्बी) को नष्ट करता है।
11 अम्लपित्त की विकृति:- अनानास को छीलकर बारीक-बारीक टुकड़े करके, उनपर कालीमिर्च का चूर्ण डालकर खाने से अम्लपित्त की विकृति नष्ट होती है।
12 खून की कमी (रक्ताल्पता):-यदि शरीर में खून की कमी हो तो अनन्नास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है। अनन्नास से रक्तवृद्धि होती है और पाचन क्रिया तीव्र होने से अधिक भूख लगती है।
13 बच्चों के पेट में कीडे़ होने पर:-कुछ दिनों तक सुबह-शाम अनानास का रस पिलाएं। इससे कीडे़ शीघ्र नष्ट होते हैं
14 गुर्दे की पथरी:- अनानास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है।
15 आंतों से अम्लता का निष्कासन:-अनन्नास के रस में अदरक का रस और शहद मिलाकर सेवन करने से आंतों से अम्लता का निष्कासन होता है।
16 स्मरणशक्ति:- अनानास के रस के सेवन से स्मरणशक्ति विकसित होती है।
17 खांसी एवं श्वास रोग:-*श्वास रोग में अनानास फल के रस में छोटी कटेरी की जड़, आंवला और जीरा का समभाग चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करें।
*पके अनानास के 10 ग्राम रस में पीपल मूल, सोंठ और बहेड़े का चूर्ण 2-2 ग्राम तथा भुना हुआ सुहागा व शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी एवं श्वास रोग में लाभ होता है।
* अनानास के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।"
*पके अनानास के 10 ग्राम रस में पीपल मूल, सोंठ और बहेड़े का चूर्ण 2-2 ग्राम तथा भुना हुआ सुहागा व शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी एवं श्वास रोग में लाभ होता है।
* अनानास के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।"
18 मधुमेह (शूगर):- अनानास मधुमेह में बहुत लाभकारी है।अनानास के 100 ग्राम रस में तिल, हरड़, बहेड़ा, आंवला, गोखरू और जामुन के बीजों का चूर्ण 10-10 ग्राम मिला दें। सूखने पर पाउडर बनाकर रखें। इस चूर्ण को सुबह-शाम तीन ग्राम की मात्रा में सेवन करने से बहुमूत्ररोग तथा मधुमेह ठीक हो जाता है। भोजन में दूध व चावल लेना चाहिए तथा लालमिर्च, खटाई और नमक से परहेज रखना चाहिए।
19 उदर (पेट) रोग में:-*पके अनानास के 10 ग्राम रस में भुनी हुई हींग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, सेंधानमक और अदरक का रस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से उदर शूल और गुल्म रोग में लाभ होता है।
* अनानास के रस में यवक्षार, पीपल और हल्दी का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग मिलाकर सेवन करने से प्लीहा, पेट के रोग और वायुगोला 7 दिनों में नष्ट हो जाता है।
* अनानास के रस में, रस से आधी मात्रा में गुड़ मिलाकर सेवन करने से पेट एवं बस्तिप्रदेश (नाभि के नीचे के भाग) में स्थित वातरोग नष्ट होता है। पेट में यदि बाल चला गया हो तो, अनानास के खाने से वह गल जाता है।"
* अनानास के रस में यवक्षार, पीपल और हल्दी का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग मिलाकर सेवन करने से प्लीहा, पेट के रोग और वायुगोला 7 दिनों में नष्ट हो जाता है।
* अनानास के रस में, रस से आधी मात्रा में गुड़ मिलाकर सेवन करने से पेट एवं बस्तिप्रदेश (नाभि के नीचे के भाग) में स्थित वातरोग नष्ट होता है। पेट में यदि बाल चला गया हो तो, अनानास के खाने से वह गल जाता है।"
20 जलोदर (पेट में पानी की अधिकता) होना:- अनानास के पत्तों के काढ़े में बहेड़ा और छोटी हरड़ का चूर्ण मिलाकर देने से दस्त और मूत्र साफ होकर, जलोदर में आराम होता है।
Story
एक बार पचास लोगों का ग्रुप किसी सेमीनार में
हिस्सा ले रहा था।
सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे
कि स्पीकर अचानक ही रुका और
सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला , ” आप
सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम
लिखना है। ”
सभी ने ऐसा ही किया।
अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया।
स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर
पांच मिनट के अंदर अपना नाम
वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।
सारे पार्टिसिपेंट्स तेजी से रूम में घुसे और
पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने
लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने
नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था…
पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया।
स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ , आप
सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने
नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?”
” नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के
नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक
पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।
“कोई बात नहीं , आप लोग एक बार फिर कमरे में
जाइये , पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले
उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम
पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है। “,
स्पीकर ने निर्दश दिया।
एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए,
पर इस बार सब शांत थे , और कमरे में किसी तरह
की अफरा-तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने
एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और
तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।
स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा , ” बिलकुल
यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर
कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई
मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद
कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह
अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के
बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता ,
दोस्तों हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई
है। जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख
जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे
तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी।और
यही मानव-जीवन का उद्देश्य
हिस्सा ले रहा था।
सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे
कि स्पीकर अचानक ही रुका और
सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला , ” आप
सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम
लिखना है। ”
सभी ने ऐसा ही किया।
अब गुब्बारों को एक दुसरे कमरे में रख दिया गया।
स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर
पांच मिनट के अंदर अपना नाम
वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा।
सारे पार्टिसिपेंट्स तेजी से रूम में घुसे और
पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने
लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने
नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था…
पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया।
स्पीकर बोला , ” अरे! क्या हुआ , आप
सभी खाली हाथ क्यों हैं ? क्या किसी को अपने
नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला ?”
” नहीं ! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के
नाम का ही गुब्बारा हाथ आया…”, एक
पार्टिसिपेंट कुछ मायूस होते हुए बोला।
“कोई बात नहीं , आप लोग एक बार फिर कमरे में
जाइये , पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले
उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम
पुकारे जिसका नाम उसपर लिखा हुआ है। “,
स्पीकर ने निर्दश दिया।
एक बार फिर सभी पार्टिसिपेंट्स कमरे में गए,
पर इस बार सब शांत थे , और कमरे में किसी तरह
की अफरा-तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने
एक दुसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और
तीन मिनट में ही बाहर निकले आये।
स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा , ” बिलकुल
यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर
कोई अपने लिए ही जी रहा है , उसे इससे कोई
मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद
कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह
अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है , पर बहुत ढूंढने के
बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता ,
दोस्तों हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुई
है। जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख
जाओगे तो अपने आप ही तुम्हे
तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी।और
यही मानव-जीवन का उद्देश्य
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